| ईसीबी की चुप्पी से आम धातुओं में नरमी | | दिलीप कुमार झा और शर्लिन डिसूजा / मुंबई August 03, 2012 | | | | |
यूरो जोन की अर्थव्यवस्थाओं को संकट से उबारने के लिए यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) की तरफ से कोई कदम नहीं उठाए जाने के चलते आम धातुएं और कीमती धातुएं लंदन के बाजार में शुक्रवार को लुढ़क गईं। कारोबारियों को उम्मीद थी कि यूरो जोन की अर्थव्यवस्थाओं को संकट से उबारने के लिए ब्याज दरों में कटौती और आर्थिक राहत आदि का ऐलान किया जाएगा। एक ओर जहां तांबे में 0.81 फीसदी की गिरावट आई और यह 7327 डॉलर प्रति टन पर बंद हुआ जबकि एल्युमीनियम और जस्ते में भी क्रमश: 0.80 व 0.06 फीसदी की गिरावट आई और यह बेंचमार्क लंदन मेटल एक्सचेंज पर 1806 डॉलर व 1807 डॉलर प्रति टन पर बंद हुआ।
कीमती धातुएं भी इस दौड़ में शामिल हुई और सोना दोपहर के कारोबार में 0.61 फीसदी टूटकर लंदन के हाजिर बाजार में 1596 डॉलर पर आ गया, वहीं चांदी में भी 1.27 फीसदी की गिरावट आई और यह 27.20 डॉलर प्रति आउंस पर बंद हुई।
ऐंजल ब्रोकिंग के सहायक निदेशक नवीन माथुर ने कहा - बाजार यूरो जोन को संकट से उबारने के लिए ईसीबी की तरफ से नीतिगत फैसले की उम्मीद कर रहा था, जो पूरी नहीं हुई और इससे बाजार को निराशा हुई।
यूरो जोन को संकट से उबारने के लिए तत्काल समाधान की खातिर ईसीबी की यह एक और बैठक थी, लेकिन इसकी समाप्ति गुरुवार को निराशा के साथ हुई। बैंक की तरफ से किसी भी तरह के नीतिगत फैसले का ऐलान नहीं किया गया। ईसीबी की बैठक काफी महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह ईसीबी अध्यक्ष के बयान के साक्ष्य के तौर पर था, जिन्होंने घोषणा की थी कि यूरो को बचाने के लिए सभी आïवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इससे निवेशकों के बीच उम्मीदें बढ़ गई थीं।
सतत मौद्रिक नीति के अभाव में यूरो जोन के देश भारी कर्ज में डूबे हुए हैं, जो इन क्षेत्रों में इनकी स्थापना के दिन से ही मौजूद थी। कर्ज के स्तर में बढ़ोतरी से पूरी अर्थव्यवस्था मंदी में धंस गई है और इलाके में रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि बेरोजगारी का स्तर साल 2012 की दूसरी तिमाही में 11.16 फीसदी के उच्चस्तर पर पहुंच गया है।
ईसीबी का फैसला आम धातुओं व कीमती धातुओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नीतिगत फैसले से डॉलर के मुकाबले यूरो में बदलाव आता। यूरो में बढ़त से आम धातुओं में उछाल में मदद मिलती, वहीं इसमें गिरावट से यूरो जोन की मुद्रा ने कीमती धातुओं को नीचे खींच लिया।
कोटक कमोडिटी सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है - इस हफ्ते सोना दबाव में आ गया क्योंकि एफओएमसी व ईसीबी ने बाजार के प्रतिभागियों को निराश किया। गौरतलब है कि अपनी अर्थव्यवस्थाओं को समर्थन प्रदान करने के लिए इन संस्थाओं ने तत्काल कोई भी कदम नहीं उठाया। हालांकि इन दोनों ही केंद्रीय बैंकों ने अतिरिक्त कदमों के लिए अपने दरवाजे खुले रखे हैं।
कोटक कमोडिटी की शोध विश्लेषक माधवी मेहता ने कहा - ईसीबी ने कहा है कि वे भविष्य में बॉन्ड की खरीद पर विचार कर सकते हैं। यह सोने के लिए बेहतर नहीं होगा क्योंकि डॉलर के मुकाबले यूरो में गिरावट आएगी।
जून 2012 में समाप्त यूरोपीय सम्मेलन में कई कदमों का ऐलान किया गया था और इनमें यूरोप की स्थिरता के लिए इंतजाम, यूरोपीय यूनियन के भविष्य के लिए स्थायी राहत फंड शामिल हैं, जो सीधे बैंकों को सहायता दे सकता है।
नेता यूरो जोन के बैंकों की निगरानी के लिए साल के अंत तक एकल निकाय बनाने पर भी सहमत हुए थे, जो यूरोपीय बैंकिंग यूनियन के लिए पहला कदम माना जा रहा था। वित्तीय स्थायित्व के मसलों के अतिरिक्त ये 120 अरब यूरो के पैकेज पर भी सहमत हुए थे, जिसका इस्तेमाल विकास को बढ़ावा देने आदि पर होता।
ईसीबी के अध्यक्ष ने हालांकि बॉन्ड की खरीदारी शुरू करने का संकेत दिया है, लेकिन नीतिगत कदम की बाबत उन्होंने इसे संबंधित सरकार पर छोड़ दिया। शेयर व जिंस बाजार पर इसका नकारात्मक असर पड़ा और गुरुवार को इन बाजारों में गिरावट दर्ज की गई।
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