| डिंपल के बाद विरासत की दौड़ में अभिजित | | कविता चौधरी / नई दिल्ली August 03, 2012 | | | | |
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद जब अखिलेश यादव ने कन्नौज लोकसभा सीट छोड़ी तो उनकी पत्नी डिंपल यादव वहां से चुनाव लड़ीं। अब प्रणव मुखर्जी के पुत्र अभिजित मुखर्जी की बारी है। अभिजित पहली बार नलहाटी (पश्चिम बंगाल) से विधानसभा चुनाव जीते हैं। अब वह जंगीपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लडऩा चाहते हैं, जो मुखर्जी ने भारत का राष्ट्रपति बनने के बाद खाली की है। अभी तक उपचुनाव की तिथि की घोषणा नहीं हुई है। हालांकि इसमें संदेह नहीं कि 'राष्ट्रपति के पुत्र' अभिजित का निवेदन कांग्रेस स्वीकार कर लेगी।
पश्चिम बंगाल से कांग्रेस के सांसदों ने पहले ही मुखर्जी को समर्थन देने की मुहिम शुरू कर दी है। उन्होंने पार्टी से अनुरोध किया है कि अभिजित को पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया जाए। बहरामपुर से कांग्रेस सांसद अधीर चौधरी ने जंगीपुर उपचुनाव में अभिजित के चुनाव लडऩे के आवेदन के बारे में कहा, 'मेरा मानना है कि अगर प्रणव मुखर्जी के पुत्र जंगीपुर से चुनाव लडऩे की इच्छा जाहिर कर रहे हैं तो आलाकमान उनकी राह में आड़े नहीं आएगा।' स्थानीय विधायक भी अपनी वफादारी नहीं खोना चाहते और वे अभिजित के समर्थन में हैं। पश्चिम बंगाल के कांग्रेस प्रभारी ने भी कहा है कि अभिजित 'युवा एवं गतिशील' नेता हैं।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जंगीपुर लोकसभा के लिए चुनाव 'निर्विरोध' हो सकता है, क्योंकि 'राष्ट्रपति के पुत्र' वहां से चुनाव लड़ेंगे। कन्नौज में भी डिंपल यादव निर्विरोध चुनी गई थीं, क्योंकि किसी भी राजनीतिक दल ने 'मुख्यमंत्री की पत्नी' के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारा।
सभी राजनीतिक दलों में परिवारों के लिए प्रतिष्ठित संसदीय क्षेत्र तैयार किए जा रहे हैं। रायबरेली और अमेठी गांधी परिवार के परंपरागत चुनाव क्षेत्र रहे हैं। अगर बीच के कुछ समय को छोड़ दिया जाए तो ऐसा फिरोज गांधी और संजय गांधी के समय से ही है।
हालांकि कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जंगीपुर लोकसभा सीट पर जीत हासिल करना अभिजित के लिए आसान नहीं होगा, जैसा डिंपल के मामले में कन्नौज में हुआ। मुर्शिदाबाद जिले में स्थित जंगीपुर मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, यह अभिजित को बुरे अनुभव भी दे सकता है। बहरहाल पहली बार विधायक बने अभिजित ने अपनी उपलब्धियां अपनी वेबसाइट पर भी डाली हैं। वह नलहाटी क्षेत्र से वाम मोर्चे के 44 साल पुराने किले को ध्वस्त करने का श्रेय भी ले रहे हैं।
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