| विदेश में अधिग्रहण के लिए कोष | | वृष्टि बेनीवाल / नई दिल्ली August 01, 2012 | | | | |
काफी ऊहापोह के बाद आखिरकार भारत विदेश में कोयला ब्लॉक जैसे प्राकृतिक संसाधन खरीदने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का एक सॉवरिन वेल्थ फंड (एसडब्ल्यूएफ) बनाने पर राजी हो गया है। मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि शुरुआत में इस कोष के लिए 1,000 करोड़ रुपये बजटीय सहायता के जरिये सरकार की ओर से आएंगे। अधिकारी ने बताया कि यह कोष एक कंपनी या न्यास भी हो सकता है जैसे यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया का विशेष उपक्रम।
अधिकारी ने कहा, 'शुरुआती 1,000 करोड़ रुपये की रकम के अलावा नई संस्था बाजार से भी रकम जुटा सकती है या फिर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के पास मौजूद अधिशेष नकदी का भी इस्तेमाल कर सकती है।'
मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल इस कोष की दरकार नहीं है। पहले अधिग्रहण के लिए बाजार की पहचान की जाएगी, उसके बाद ही कोष की जरूरत पड़ेगी। इस मामले पर हुई अंतर-मंत्रालय बैठक में कोष की खातिर रकम जुटाने के विभिन्न सुझाव पेश किए गए। कुछ मंत्रालयों का कहना था कि यह कोष करीब 27,500 करोड़ रुपये का होना चाहिए जबकि कुछ इस कोष की रकम 55,000 करोड़ रुपये रखने के पक्ष में थे।
इस मसले पर अंतिम फैसला नए वित्त मंत्री पी चिदंबरम और आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम कर सकते हैं। इसके बाद ही इस पर कैबिनेट नोट जारी किया जाएगा। इससे पहले कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा था कि सरकार एक सॉवरिन फंड बनाने पर विचार कर रही है, जिससे विदेशों में कोयला ब्लॉक खरीदने में मदद मिलेगी।
भारत जिन देशों में कोयला ब्लॉक का अधिग्रहण करने की संभावना तलाश रहा है उनमें अऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, मोजांबिक, अमेरिका और इंडोनेशिया शामिल हैं। आमतौर पर विदेशी मुद्रा विनिमय भंडार रखने वाले देश ही सॉवरिन वेल्थ फंड बनाते हैं। चीन, नॉर्वे, सिंगापुर, सऊदी अरब और पश्चिम एशिया के अन्य देशों के पास काफी बड़े सॉवरिन फंड हैं। ये फंड अपने ही देश या विदेश में शेयर, सोना व अन्य परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं। हालांकि भारत का सॉवरिन फंड विदेश में प्राकृतिक संसाधनों में ही निवेश करेगा।
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