| खेती की गाड़ी को मक्का का धक्का | | शिखा शालिनी / July 27, 2012 | | | | |
बिहार मक्के के उत्पादन में सफलता पाने की राह पर कदम बढ़ा रहा है। राज्य के कुछ हिस्से के किसानों ने कुछ सालों से गेहूं के मुकाबले मक्के की खेती में ज्यादा दिलचस्पी भी दिखानी शुरू कर दी है। राज्य में 7 लाख हेक्टेयर जमीन पर 20 लाख टन मक्के का उत्पादन होता है। लेकिन महज उत्पादन बढ़ाने से कुछ नहीं होता और जमीनी हकीकत इसी बात को बयां कर रही है।
मक्के की फसल का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए राज्य में इस फसल के प्रसंस्करण की पर्याप्त सुविधा नहीं है। ऐसे में किसानों को अपनी फसल का बड़ा हिस्सा राज्य से बाहर भेजना पड़ता है जिसका इस्तेमाल कर मक्के आधारित कई खाद्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। वैसे तो राज्य में सीमित संख्या में मझोले स्तर की पंजीकृत मक्का प्रसंस्करण इकाइयां मौजूद हैं लेकिन फसल उत्पादन के लिहाज से यह पर्याप्त नहीं है।
हालांकि उद्योग मंत्री रेणु कुमारी इस क्षेत्र के लिए संभावनाओं पर जोर देते हुए कहती हैं, 'राज्य में 9 मक्का प्रसंस्करण इकाइयों को मंजूरी मिली है जिसकी लागत 16179.78 लाख रुपये है।' खाद्य प्रसंस्करण विभाग के मुताबिक इन प्रसंस्करण इकाईयों के लिए 1705.20 लाख रुपये के अनुदान की मंजूरी दी गई है जिसमें से उन्हें कुल 295.03 की राशि जारी की गई है। हालांकि इस क्षेत्र में रोजगार सृजन के आंकड़े 613 तक ही सीमित हैं।
राज्य में कुछ निजी क्षेत्र के बड़े खिलाडिय़ों ने मक्का प्रसंस्करण में अपनी दिलचस्पी दिखाई है। मसलन तमिलनाडु की गैसोहोल लिमिटेड ने एथेनॉल और अल्कोहल के उत्पादन के लिए 2500 करोड़ रुपये की लागत से 4 मक्का प्रसंस्करण संयंत्र बेगूसराय, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, वैशाली जिले में लगाने की योजना बनाई है। बिहार सरकार के सांख्यिकीय एवं मूल्यांकन निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2009-10 मक्के का कुल उत्पादन तकरीबन 1478623 टन था जबकि प्रति हेक्टेयर पैदावार 2307 किलोग्राम रही। हालांकि यह आंकड़ा इससे पहले साल के मुकाबले काफी कम है। वर्ष 2008-09 में मक्के का कुल उत्पादन 1719811 टन था जबकि प्रति हेक्टेयर पैदावार 2733 किलोग्राम था। बिहार में मुजफ्फरपुर, मोतिहारी और सीवान जैसे क्षेत्र मक्के के ज्यादा उत्पादन वाले क्षेत्रों में शुमार हैं।
रेणु कुमारी का कहना है कि बिहार सरकार पुरजोर तरीके से प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए बुनियादी ढांचे की समस्या को दूर करने की भरपूर कोशिश कर रही है। वहीं उद्योग विभाग के विशेष सचिव विजय कुमार कहते हैं, 'राज्य में मक्के के उत्पादन और प्रसंस्करण के नतीजे बेहद उत्साहजनक नहीं दिख रहे हैं। हालांकि राज्य के सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, कटिहार जैसे क्षेत्रों में मक्के का ज्यादा उत्पादन होता है।' बेशक राज्य में मक्के के प्रसंस्करण की संभावनाएं तो हैं जिसका फायदा किसानों को मिल सकता है लेकिन बुनियादी ढांचे के विकास के बिना यह लक्ष्य अधूरा ही रहेगा।
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