| निवेश से भरने लगी बिहार की थाली | | सत्यव्रत मिश्र / July 27, 2012 | | | | |
बिहार में निवेशकों को खाद्य प्रसंस्करण खासा रास आ रहा है। पिछले पांच साल में ही राज्य में इस क्षेत्र में करीब 2,000 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। इस क्षेत्र में ब्रिटानिया और पारले समेत कई कंपनियों की करीब 60 इकाइयां भी स्थापित हो चुकी हैं।
दरअसल सरकार ने 2008 में राज्य में खाद्य प्रसंस्करण नीति बनाई गई थी। इसमें निवेशकों को लुभाने के लिए सब्सिडी का प्रावधान भी था, जिसके तहहत इस क्षेत्र की इकाइयों को 40 फीसदी तक अनुदान मिल रहा है। इसकी वजह से स्थानीय निवेशकों ने खाद्य प्रसंस्करण में रकम लगानी शुरू की और यह देखकर बड़ी कंपनियां भी यहां खिंच आईं।
मजबूत बुनियाद
सरकार भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। उद्योग विभाग के निदेशक ए के मल्लिक ने कहा, 'हमारी असल ताकत कृषि है। फल और सब्जी के उत्पादन में हम देश में पहले पायदान पर हैं। शहद उत्पादन में भी यही हाल है। ऐसे में खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाएं दुहने पर हम पूरा जोर दे रहे हैं।' उन्होंने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण नीति का निवेशकों पर अच्छा असर पड़ा और स्थानीय निवेशकों की मदद से इस क्षेत्र के लिए मजबूत बुनियाद तैयार कर ली गई।
मल्लिक ने कहा, 'इससे किसानों की कमाई में भी जबरदस्त इजाफा हो रहा है। खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी कंपनियां सीधे किसानों से उनकी उपज खरीद रही हैं। इससे बिचौलियों की धमक कम हुई है और लोगों को अच्छा खासा रोजगार मिल रहा है।'
चुनौतियां भी बड़ी
फल और सब्जियों के उत्पादन के मामले में बिहार इस वक्त देश में सबसे आगे है, लेकिन प्रसंस्करण क्षमता में वह मात खा जाता है। राज्य के विकास आयुक्त अशोक कुमार सिन्हा ने पिछले दिनों बताया था, 'प्रसंस्करण क्षमता तैयार करना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। हम फल और सब्जी तो खूब उगाते हैं, लेकिन प्रसंस्करण क्षमता के अभाव में हमारा माल दूसरे राज्यों में चला जाता है। इसीलिए हम यह क्षमता तैयार करना चाहते हैं।' उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष में 70 लाख टन धान बिहार में पैदा हुआ है, लेकिन यहां 9-10 लाख टन धान की कुटाई क्षमता है। इसलिए बिहार का धान पंजाब और हरियाणा जा रहा है।
सिन्हा ने बताया कि खाद्यान्न की बर्बादी रोकने के लिए फूड पार्क बनाए जा रहे हैं। भागलपुर में मेगा फूड पार्क को मंजूरी मिल गई है और दूसरे पार्क को भी जल्द मंजूरी की उम्मीद है। राज्य स्तर पर भी दो फूड पार्क की कोशिश चल रही है।
खिंच आए निवेशक
बिहार में निवेशक खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर मेहरबान हैं। खाद्य प्रसंस्करण नीति से उत्साहित होकर यहां निवेश करने वाले और इकाइयां चालू करने वालों में ब्रिटानिया, पारले और अनमोल बिस्किट शामिल हैं। नेस्ले और आईटीसी भी राज्य सरकार से बात कर रही हैं।
उप मुख्यममंत्री सुशील कुमार मोदी ने बताया, 'बड़े निवेशकों के साथ छोटे-मझोले उद्यमी भी बिहार आ रहे हैं। खाद्य प्रसंस्करण में पूंजी की ज्यादा दरकार नहीं होती और रोजगार खूब मिलता है। इसलिए इसका विकास होना लाजिमी है।' मोदी ने बताया कि राज्य की मौजूदा जरूरत को ध्यान में रखते हुए सरकार भी ऐसे ही उद्योगों को बढ़ावा दे रही है।
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