| बैंकों को मिली क्लीन चिट | | सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली July 27, 2012 | | | | |
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2008 में लाइसेंस हासिल करने वाले नए ऑपरेटरों को भारी भरकम ऋण उपलब्ध कराने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को क्लीन चिट दे दी है।
माना जा रहा है कि इन बैंकों ने साथ मिलकर करीब 26,000 करोड़ रुपये का ऋण कम से कम 5 ऑपरेटरों को उपलब्ध कराया था जिनमें एसटेल, यूनिटेक, डाटाकॉम, लूप और स्वान टेलीकॉम (एतिसालात डीबी) व अन्य शामिल हैं। इन कंपनियों को ऋण उपलब्ध कराने वाले बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नैशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कॉरपोरेशन बैंक आदि शामिल हैं।
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को देख रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष अपनी प्रस्तुति में जांच एजेंसी ने कहा कि 2008 में लाइसेंस हासिल करने के लिए ऑपरेटरों द्वारा लिये गए इस प्रकार के ऋण की विस्तृत जांच की गई और इसका संचालन सीबीआई की बैंकिंग प्रतिभूति एवं धोखाधड़ी सेल ने किया। सीबीआई ने कहा कि इसमें कोई बड़ी अनियमितता नहीं दिखी। विशेषज्ञों का कहना है कि उस समय बैंकिंग क्षेत्र ने दूरसंचार क्षेत्र को करीब 3 फीसदी कर्ज दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह 2008 में दूरसंचार लाइसेंस हासिल करने वाली कुछ कंपनियों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा उपलब्ध कराए गए भारी भरकम ऋण की जांच करे। सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को यह भी पता लगाने का निर्देश दिया था कि निजी क्षेत्र की कंपनियों को ऋण उपलब्ध कराने में कहीं दूरसंचार विभाग के अधिकारी शामिल तो नहीं थे।
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