| डीजल, एलपीजी की जल्द नहीं बढ़ेंगी कीमतें! | | बीएस संवाददाता / मुंबई July 24, 2012 | | | | |
डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि अभी सरकार सहयोगी राजनीतिक पार्टियों के साथ विवादास्पद मुद्दों पर सहमति नहीं बना पाई है। हाल ही में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे सहयोगियों का आक्रामक रूप देख चुकी सरकार कीमतों में बढ़ोतरी के मुद्दे पर सभी सहयोगियों को एक साथ लेकर चलना चाहती है।
डीजल, घरेलू गैस और केरोसिन की कीमतों में पिछली बढ़ोतरी जून 2011 में हुई थी। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वह कीमतों में बढ़ोतरी चाहते हैं लेकिन कोई भी राजनेता सहमत नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमें सहमति बनाने का कार्य करना होगा।' उन्होंने कहा कि उप राष्ट्रपति का चुनाव 7 अगस्त को है और तब तक कीमतें नहीं बढ़ाई जा सकतीं। संसद का मॉनसून सत्र 8 अगस्त को शुरू होगा और सत्र के दौरान सरकार के लिए यह निर्णय लेना मुश्किल होगा। हालांकि जब संसद का सत्र चल रहा हो उस समय कीमतें बढ़ाने में तकनीकी रूप से कोई बाधा नहीं है।
अधिकारी ने कहा, 'सबसे महत्त्वपूर्ण सुधार खुदरा में एफडीआई को मंजूरी देना नहीं बल्कि डीजल, एलपीजी और केरोसिन पर सब्सिडी को कम करना है।' चालू वित्त वर्ष में डीजल, केरोसिन और एलपीजी पर सब्सिडी बढ़कर 1,60,000 करोड़ रुपये पर पहुंच सकती है, जो पिछले साल 1,38,500 करोड़ रुपये थी। अगर कीमतें नहीं बढ़ाई गईं तो सरकार को करीब 96,000 करोड़ रुपये का बोझ वहन करना पड़ सकता है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम फिलहाल डीजल की बिक्री पर 9.95 रुपये प्रति लीटर का घाटा वहन करती हैं। वहीं उन्हें घरेलू उपभोग वाले एक 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलिंडर की बिक्री पर 319 रुपये का नुकसान हो रहा है। इससे अलावा उन्हें केरोसिन पर 27.20 रुपये प्रति लीटर की हानि हो रही है।
उन्होंने कहा कि इन तीनों ईंधनों की कीमतों के निर्धारण के लिए अधिकृत मंत्री समूह के पिछले प्रमुख प्रणव मुखर्जी के राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने के लिए वित्त मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद इसकी पुनर्गठन नहीं हुआ है। अधिकार प्राप्त मंत्री समूह (ईजीओएम) न होने से मंत्रालय कीमतों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) को भेजने का विचार कर रहा है और इस निर्णय को प्रधानमंत्री पर छोड़ रहा है।
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