कुल्लू घाटी के पूर्वोत्तर में स्थित इस गांव में जामलू देवता की पूजा की जाती है। चुनाव में जामलू देवता ही प्रत्याशी के भाग्य का फैसला करते हैं और मतदाता उसका पालन करते हैं।
बाहरी लोगों को भले ही मलाना की कहानी अजीब लगे लेकिन वास्तविकता यही है कि यहां निर्णय लेने की अनूठी व्यवस्था का पालन किया जाता है तथा उच्च सदन :जैस्थांग: और निचले सदन :कनिष्ठ: पूछते हैं कि चुनाव में किस पार्टी का समर्थन करना है।
अंतिम फैसला उच्च सदन का होता है जिसका ग्राम पंचायत प्रतिनिधित्व करती है। यहां तक कि, चुनाव के दौरान राजनीतिक समर्थन पर फैसले की घोषणा से पहले पंचायत देवता का आह्वान करती है।
मलाना गांव समुद्र तल से 3029 मीटर की उंचाई पर है और अब तक ग्रामीणों ने फैसला नहीं किया है कि किसे वोट देना है।
गांव के पुजारी सुरजन ने प्रेस ट्रस्ट से कहा चार नवंबर के चुनाव के लिए हमें अभी फैसला करना है। पंचायत तय करेगी कि किसे समर्थन देना है।
हिमाचल प्रदेश की 68 सदस्यीय विधानसभा के लिए चार नवंबर को चुनाव होना है।
सुरजन ने कहा कि जैस्थांग में कारदार और गुर आते हैं। कारदार स्थानीय देवता के प्रशासक और गुर देवता के प्रवक्ता होते हैं।
उन्होंने कहा पुजारी और गांव के आठ प्रमुख सदस्य भी पंचायत के सदस्य हैं। यह निकाय चुनाव का फैसला घोषित करने से पहले जामलू देवता का आह्वान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि गांव में अन्य सभी फैसले मलानियों के बीच आपसी सहमति से किए जाते हैं।