देश ने 2011..12 के फसल वर्ष :जुलाई से जून: में रिकार्ड 10 करोड़ 43.1 लाख टन चावल का उत्पादन किया था।
यूएसडीए ने एक ताजा रिपोर्ट में कहा, ै अधिक उपज के कारण 2012-13 मंे चावल की फसल को 10 लाख टन बढ़ाकर 9.9 करोड़ टन किया गया है। यह अभी भी पिछले साल के रिकार्ड से पांच प्रतिशत कम है। ै
इसमें कहा गया है कि अगस्त और सितंबर में पूर्वी और पूर्वोत्तर के चावल क्षेत्रों में देरी से आए मानसून की वजह से खरीफ फसल के लिए अनुकूल परिस्थिति बनी। सरकार के पहले अग्रिम अनुमान में खरीफ फसल मंे 8.56 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया है, लेकिन यह पिछले साल के रिकार्ड उत्पादन से पांच प्रतिशत कम है।
अगस्त में संयुक्त राष्ट्र की इकाई खाद्य एवं कृषि संगठन :एफएओ: ने मानसून की देर से शुरुआत के कारण भारत का चावल उत्पादन 9.85 करोड़ रहने का शुरुआती अनुमान व्यक्त किया था। देर से आये मानसून के कारण प्रमुख उत्तरी और दक्षिणी उत्पादक क्षेत्रों में कम बरसात हुई थी।
यूएसडीए ने वर्ष 2012..13 में वैश्विक चावल उत्पादन रिकार्ड 46.51 करोड़ टन रहने की भविष्यवाणी की जो वर्ष 2011..12 के 46.49 करोड़ टन के उत्पादन से मामूली अधिक है।
चावल की वैश्विक औसत उपज रिकार्ड 4.37 टन प्रति हेक्टेयर होने का अनुमान है, जो 2011..12 की उपज से मामूली अधिक है।