| बारिश नहीं, बुआई में दिखने लगा है सुधार | | संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली July 22, 2012 | | | | |
देश के कई इलाकों में मॉनसून की बारिश में कमी के चलते खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों की बुआई 20 जुलाई तक सामान्य से कम रही है। हालांकि अच्छी खबर यह है कि एक हफ्ते पहले के मुकाबले ज्यादातर फसलों की बुआई में पिछले हफ्ते खास तौर से सुधार देखा गया है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि हफ्ते दर हफ्ते के आधार पर धान का रकबा 49.3 फीसदी, मोटे अनाज का रकबा 140.01 फीसदी, दलहन का रकबा 97 फीसदी, तिलहन का रकबा 60.2 फीसदी और कपास का रकबा 29.3 फीसदी बढ़ा है।
केंद्रीय कृषि सचिव आशीष बहुगुणा ने शनिवार को छह राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा के आला अधिकारियों के साथ बैठक के बाद कहा - यह बढ़ोतरी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक बुआई मोटे तौर पर सामान्य से कम रही है। कम बारिश के प्रतिकूल असर से इन राज्यों पर खासा असर पडऩे की संभावना है।
फसलों के आधार पर आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि पिछले हफ्ते तक सामान्य रकबे के मुकाबले धान का रकबा करीब 6 फीसदी, मोटे अनाज का 24.3 फीसदी, दलहन का 22.3 फीसदी, तिलहन का 0.68 फीसदी और कपास 3.50 फीसदी कम रहा है, जो पिछले 10 सालों की समान अवधि में औसत रहा था। भारतीय मौसम विभाग ने मॉनसून पर अपनी पिछली भविष्यवाणी में कहा था कि अगले महीने के मध्य से देश के ज्यादातर इलाकों में बारिश में सुधार नजर आएगा। बहुगुणा ने कहा - अगले हफ्ते की शुरुआत से लेकर अगला 10 दिन उन इलाकों के लिए काफी महत्वपूर्ण होगा, जहां कम बारिश के चलते अभी तक बुआई नहीं हो पाई है और हम लगातार स्थिति की समीक्षा करेंगे।
कुल मिलाकर शनिवार तक दक्षिण पश्चिम मॉनसून की बारिश देश में सामान्य से करीब 22 फीसदी कम रही है। जुलाई में देश में बारिश में कमी जून के 31 फीसदी के मुकाबले घटकर सामान्य से 15 फीसदी कम रही गई है।
साल 2009 में देश को तीन दशक में सूखे के सबसे खराब दौर से गुजरना पड़ा था और इसके चलते सब्जियों व दालों के दाम बढ़ गए थे। पंजाब और हरियाणा में हालांकि मौजूदा स्थिति बहुत ज्यादा निराशाजनक नहींं है, लेकिन जलाशयों के स्तर में भारी कमी के चलते रबी की बुआई पर भी सीधा असर पड़ सकता है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि 19 जुलाई तक पंजाब, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के छह प्रमुख जलाशयों में से 5 का जलस्तर 40 फीसदी नीचे है।
|