स्वयंसेवी संस्थान आक्सफेम द्वारा बिहार, झारखंड, ओडीसा, छत्तीसगढ, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों में मातृत्व स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए व्यास जी ने आज कहा कि प्रदेश में कुपोषण को लेकर एक कोर टीम बनाने पर विचार किया जा रहा है जिसकी बैठक आगामी आठ नवंबर को आयोजित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यूनिसेफ के नेतृत्व में आयोजित होने वाली इस बैठक में कोर टीम द्वारा कुपोषण के निदान के लिए सुझाए गए उपायों पर उनका विभाग एक रणनीति बनाकर उसे अमली जामा पहनाने का प्रयास करेगा।
मातृत्व मृत्य दर गरीबी और महिलाओं को समाज में बराबरी से जुडा मसला है और इसके निदान के लिए हर स्तर से प्रयास किया जाना चाहिए।
प्रसिद्ध साहित्यकार और उपन्यासकार प्रेमचंद की एक कहानी के पात्र घीसू की पत्नी का उदाहरण देते हुए व्यास जी ने कहा कि प्रसव पीडिता तबतक काम करती रहे जबतक उसे दर्द शुरू नहीं हो जाए। ऐसे में हम किस अमानवीय युग में अभी भी रह रहे हैं यह सोचने की बात है।
उन्होंने कहा कि प्रसव को लेकर पूर्व में जो अवधारणा थी, लगता है कि आज भी गांव में यह पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।