वैग्यानिकों का कहना है कि यह रोबोट जंगलों, सुरंगों और क्षतिग्रस्त भवनों में भी उड़ान भर सकता है ।
उनका कहना है कि यह आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य को आसान बनाने में काफी मददगार साबित हो सकता है ।
उड़ान भरने वाली छोटी मशीनें पहले से ही चलन में हैं और इन्हें जीपीएस की मदद से नियंत्रित किया जाता है ।
कोर्नेल विश्वविद्यालय के आशुतोष सक्सेना और उनकी टीम इसके सबसे मुश्किल भाग पर काम कर रही है...... और वह है इसे उड़ान भरते वक्त दीवारों और पेड़ की टहनियों आदि से टकराने से बचाना ।
इन रोबोटों को नियंत्रित कर रहा मनुष्य हमेशा बहुत आसानी से और जल्दीबाजी में प्रतिक्रिया नहीं दे सकता है और रोबोट जहां भी जाए वहां रेडियो सिग्नल का पहुंचना भी संभव नहीं है ।
इन अनुसंधान के परिणाम को पुर्तगाल में आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन इंटेलिजेंट रोबोट्स एण्ड सिस्टम्स में पेश किया गया ।