प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज यह स्पष्ट कर दिया कि जनरल ऐंटी अवॉयडेंस रूल्स (गार) को नए सिरे से लिखा जाएगा और सरकार इसके कारण निवेशकों के मनोबल पर पड़े नकारात्मक प्रभावों को हटाना चाहती है। दरअसल चालू वित्त वर्ष के लिए 16 मार्च को पेश किए गए बजट में प्रस्तावित इन प्रावधानों पर काफी विवाद हुआ है।
गार के दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देने के लिए इक्रियर प्रमुख और 2004 से 2008 के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम के सलाहकार रहे पार्थसारथि शोम की अगुआई में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। शोम गार से जुड़े सभी पक्षों के साथ गहन विचार-विमर्श करने के बाद गार के दिशानिर्देशों का मसौदा बनाएंगे और इसके कार्यान्वयन के लिए खाका तैयार कर 30 सितंबर तक सरकार को सौंपेंगे।
प्रसिद्घ कर विशेषज्ञ शोम की अगुआई वाली इस समिति अन्य सदस्यों में बीमा नियामक आईआरडीए के पूर्व चेयरमैन एन रंगाचारी, एनआईपीएफपी के प्रोफेसर अजय शाह और राजस्व विभाग के कर नीति एवं विधायिका (टीपीएल) के संयुक्त सचिव सुनील गुप्ता शामिल हैं।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सी रंगराजन ने कहा कि गार लाने की असली मंशा विदेशी निवेशकों का संदेह हटाना था और अंतिम दिशानिर्देश यह सुनिश्चित करेंगे। शोम, जनवरी 2008 से जनवरी 2011 के दौरान ब्रिटेन में राजस्व एवं सीमा शुल्क विभाग के मुख्य अर्थशास्त्री भी रहे हैं। इसके अलावा समिति में शामिल केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के पूर्व चेयरमैन रंगाचारी, बीमा नियामक आईआरडीए के पहले चेयरमैन थे।
27 जून को वित्त मंत्रालय के सचिवों के साथ हुई प्रधानमंत्री की बैठक के बाद गार के प्रावधानों को इंटरनेट पर डाल दिया गया था।
विशेषज्ञ समिति जुलाई के अंत तक इस मसले से जुड़े सभी पक्षों से गार दिशानिर्देशों के दूसरे मसौदे पर व्यापक सलाह करेगी और गार दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देगी। इसके बाद समिति गार निर्देशों के क्रियान्वयन के लिए खाका तैयार कर सरकार के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किए गए बयान में कहा कि गार को एक साल यानी 2013 तक टालना अच्छा कदम है। गार प्रावधानों पर चर्चा करने के लिए व्यापक विचार-विमर्श की प्रक्रिया बेहद जरूरी थी, जिससे लोग गार के परिचालन के तरीके से वाकिफ हो सकें। बयान में यह भी कहा गया है कि गार दिशानिर्देशों का पहले मसौदा को अंतिम रूप देने से पहले राजस्व विभाग ने सभी पक्षों से इस बारे में कुछ सलाह-मशविरा किया था। हालांकि प्रधानमंत्री की पहल पर विभाग ने दिशानिर्देशों के मसौदे को इंटरनेट पर डाल दिया था। बयान में कहा गया कि कई लोगों ने इस अच्छी पहल बताया क्योंकि इससे गार के प्रस्तावित प्रावधानों से जुड़ी आशंकाओं को कम करने में मदद मिली।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा, 'ये कदम अपने आप में काफी अच्छी पहल हैं लेकिन इस बारे में व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत महसूस की गई। गार से जुड़े कई मसलों पर ज्यादा स्पष्टता की दरकार है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जो इस विचार-विमर्श की प्रक्रिया में पारदर्शिता और ऊंचे स्तर की तकनीकी विशेषज्ञता साथ लाएगी।'
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