| जून में वनस्पति तेल का आयात 9 फीसदी घटा | | एजेंसियां / नई दिल्ली July 13, 2012 | | | | |
भारत में वनस्पति तेलों का आयात लगातार 4 महीने तक बढऩे के बाद जून में 9 फीसदी घटकर 7.83 लाख टन रह गया क्योंकि कारोबारी खरीद से परहेज कर रहे थे। हालांकि तेल वर्ष (नवंबर से अक्टूबर) के पहले 8 महीनों के दौरान (खाद्य एवं अखाद्य) वनस्पति तेलों का आयात करीब 25 फीसदी बढ़कर 63.95 लाख टन हो गया। भारत अपनी घरेलू जरूरतों के करीब आधे हिस्से का आयात करता है। मौजूदा समय में कच्चे खाद्य तेल के आयात पर शुल्क शून्य है जबकि रिफाइंड खाद्य तेलों पर यह शुल्क 7.5 फीसदी है।
भारत ने तेल वर्ष 2010-11 में रिकॉर्ड 86.7 लाख टन वनस्पति तेलों का आयात किया था। पाम तेल का आयात इंडोनेशिया और मलेशिया से किया जाता है जबकि सोयाबीन तेलों का आयात ब्राजील और अर्जेन्टीना से किया जाता है। सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने एक बयान में कहा, जून 2012 के दौरान आयात 7,83,315 टन का हुआ, जो जून 2011 में 8,62,550 टन था। जून के महीने में खाद्य तेलों का आयात घटकर करीब 7.7 लाख टन रह गया, जो पिछले वर्ष के समान महीने में 82.8 लाख टन था। जबकि अखाद्य तेलों का आयात पिछले वर्ष के 33,591 टन से घटकर पिछले महीने 13,430 टन रह गया।
वनस्पति तेलों के आयात में फरवरी से मई 2012 की अवधि में बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन पिछले महीने यह घट गया। इसमें कहा गया है कि चालू तेल वर्ष में नवंबर 2011 से जून 2012 के बीच वनस्पति तेलों का कुल आयात 24.65 फीसदी बढ़कर 63,95,199 टन हो गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान 51,30,224 टन था। तेल वर्ष 2011-12 के पहले आठ महीनों के आंकड़ों के अनुसार कुल आयात में रिफाइंड तेलों का हिस्सा पिछले वर्ष की समान अवधि के 13 फीसदी से बढ़कर 19 फीसदी हो गया है। संगठन ने यह भी अनुमान लगाया है कि 1 जुलाई 2012 की स्थिति के अनुसार देश के विभिन्न बंदरगाहों में खाद्य तेलों का मौजूदा स्टॉक 9.10 लाख टन का है और पाइपलाइन में यह स्टॉक 7.8 लाख टन है। बंदरगाहों और पाइपलाइनों को मिलाकर कुल स्टॉक 16.9 लाख टन है।
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