Search BS HindiWeb         Follow us on 
Saturday, May 25 ,2013  Update: 07:01 AM
होम | बाजार | कंपनियां | अर्थव्यवस्था | मुद्रा | विश्लेषण | निवेश | जिंस | क्षेत्रीय | व्यापार गोष्ठी | जिरह
 
होम विशेष खबर
Bookmark and Share

जवाबदेही और जिम्मेदारी तय करे सरकार
ए के भट्टाचार्य /  July 10, 2012

यदि आप किराये के मकान में रह रहे हों और कल्पना करिए कि किसी दिन सुबह उठकर आपको मकान को सहारा देने वाले खंभे में बड़ी दरार नजर आए। तब आप क्या करेंगे? अधिक संभावना इसी बात की है कि आप अपने मकान मालिक से संपर्क करेंगे और उससे उसकी मरम्मत कराने के लिए कहेंगे। यदि जरूरत हुई तो जब तक मकान की तसल्लीबख्श मरम्मत न हो जाए तब तक मकान मालिक आपके रहने के लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम करेगा।
दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सपे्रस के साथ कुछ ऐसा ही वाकया हुआ है। यह 22 किलोमीटर लंबी रेल लाइन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन के नए नवेले टर्मिनल 3 से जोड़ती है। बहरहाल इस मामले में जिम्मेदार पक्षों की प्रतिक्रिया कुछ जुदा नजर आई जिसके खतरनाक परिणाम आने वाले दिनों में देश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की महत्त्वाकांक्षी योजना को पलीता लगा सकते हैं।
इस साल जून में इसकी परिचालक कंपनी को रेल लाइन को सहारा देने वाले खंभों में कुछ दरारें नजर आईं। हालांकि उससे पहले ही मुसाफिरों ने इस बात पर गौर किया था कि इस मार्ग पर गाड़ी की रफ्तार कुछ मद्घम पड़ रही है जिससे यात्रा में ज्यादा वक्त लगने लगा जबकि शुरू में दावा किया गया था कि इसके जरिये नई दिल्ली से हवाई अड्डे की यात्रा महज 18 मिनट में पूरी हो जाएगी।
इसलिए एयरपोर्ट लाइन की परिचालक कंपनी ने क्या किया? याद रखना होगा कि दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत चालू हुई है। इसका अर्थ यही है कि परिचालन के अलावा पुल, सुरंग और स्टेशन बनाने जैसे सभी निर्माण कार्य दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने किए हैं जबकि इसका परिचालन दिल्ली मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड के पास है जिसमें 95 फीसदी हिस्सेदारी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और 5 फीसदी हिस्सा स्पेन की एक कंपनी का है। चूंकि इस परियोजना के लिए बुनियादी ढांचा डीएमआरसी ने तैयार किया है इसलिए यह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। डीएमआरसी और परिचालक कंपनियों द्वारा परियोजना का संयुक्त निरीक्षण किया गया था। यह साफ हो गया कि सबसे सुरक्षित विकल्प यही होगा कि जब तक सुरक्षा संबंधी खामियों को दुरुस्त न कर लिया जाए तब तक उसका परिचालन बंद कर दिया जाए। इस मामले को और जटिल बनाने की कई बातें पहले ही चुकी हैं।
कुछ रिपोर्टों के आधार पर मई में डीएमआरसी प्रमुख ने एयरपोर्ट लाइन के परिचालन को लेकर अपनी नाखुशी जाहिर की थी। इसके एक महीने बाद खुद परिचालक कंपनी ने अपने स्तर पर दरारों का मुआयना कराया और पाया कि मौजूदा हालात में इस पर गाड़ी चलाना सुरक्षित नहीं होगा। यदि बंद होने से कुछ हफ्ते पहले एयरपोर्ट लाइन पर गाड़ी की रफ्तार मंद होने लगी तो यही लगा कि अगर गाड़ी 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर चली तो दरारों की वजह से बड़ी दुर्घटना घट सकती है।
आखिर क्या बात थी जिसने डीएमआरसी को तत्काल प्रभाव से इस मार्ग पर सेवा बंद करने से रोका वह भी तब तक उसके अधिकारी को उन दरारों और उनकी वजह से होने वाले नुकसान का अंदाजा था? यह पीपीपी मॉडल की परियोजना है जिसमें विभिन्न अंशभागियों पर अस्पष्ट जिम्मेदारी है जिसकी वजह से ऐसी अनदेखी हुई-एक ऐसी कवायद जिससे दुर्घटना के चलते तमाम लोगों की जान जा सकती हो। यदि परिचालक एकतरफा सेवा बंद करने का ऐलान करता तो इसमें डीएमआरसी अडंग़ा अड़ा सकती जो केवल बुनियादी ढांचे के लिए जिम्मेदार है, जो सेवा बंद करने से पहले एक व्यापक निरीक्षण की मांग करती। हूबहू ऐसा ही हुआ जिसमें कई दिन ऐसे ही निकल गए।
उसके बाद तो और भी बुरा होना था। यहां तक कि  डीएमआरसी और दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्रबंधन को दरारों के बारे में मालूम था, फिर भी उन्हें यही लगा कि सेवा बंद करने से पहले उन्हें किसी और की मंजूरी की जरूरत है। दिल्ली की मुख्यमंत्री को इस हालात में सेवा जारी रखने के संभावित खतरों के बारे में बताया गया। फिर भी फैसला नहीं लिया गया। उसके बाद मामला शहरी विकास मंत्रालय के पास गया जो इस तरह की भीमकाय परिवहन परियोजनाओं को देखता है। शहरी विकास मंत्री कमलनाथ को इसके बारे में बताया गया। एयरपोर्ट मेट्रो मंत्री स्तर पर उच्च स्तरीय बैठक और बहस के बाद 8 जुलाई को ही बंद हुई। सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे के दांव पर लगे होने के बावजूद डीएमआरसी और दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस ने मंत्री स्तर पर मंजूरी का इंतजार क्यों किया?
कुछ और ङ्क्षचताजनक मामले हैं। एयरपोर्ट लाइन के लिए बिछाई गई लाइन, सुरंग और पुलों की देखरेख के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या पीपीपी मॉडल में बुनियादी ढांचा विकसित करने वाले और परिचालक की जिम्मेदारियों का स्पष्ट वितरण था? यहां स्मरण रखना होगा कि ब्रिटिश रेल का तब क्या हाल हुआ था जब इसकी रेल लाइनों की जिम्मेदारी एक कंपनी को और सेवा संचालन की जिम्मेदारी दूसरी कंपनी को सौंपी गई थी। इससे न केवल रेलवे लाइनों की हालत खस्ता हुई और कम जवाबदेही का भाव रहा बल्कि रेलवे परिचालन की गुणवत्ता में कमी आने से दुर्घटनाओं की संख्या भी बढऩे लगी।
दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस को भी उसी किस्म की समस्या से जूझना पड़ा। इसके लिए बुनियादी ढांचा तो डीएमआरसी ने तैयार किया लेकिन इसका परिचालन दूसरी कंपनी के पास था। ऐसी स्थिति में सभी अंशभागियों की स्पष्ट जिम्मेदारी और भूमिका तय करने की जरूरत होती है। ऐसी स्पष्टता के अभाव में परिवहन क्षेत्र में पीपीपी मॉडल में सुरक्षा और सेवाओं की गुणवत्ता खराब ही हो सकती है। पीपीपी मॉडल के तहत जब कई अन्य मेट्रो रेल परियोजनाएं विकसित हो रही हैं, ऐसे में सरकार को इन परियोजनाओं में एक अनुबंध लागू करने में बिलकुल भी देरी नहीं करनी चाहिए। यदि कोई किरायेदार एक साधारण से अनुबंध के जरिये मकान मालिक से उसकी जिम्मेदारी का निर्वहन करा सकता है तो कोई वजह नजर नहीं आती कि सरकार उन बड़ी परिवहन परियोजनाओं में यह सुनिश्चित क्यों नहीं कर सकती जिनमें भारी तादाद में मुसाफिरों का जीवन दांव पर लगा हो।

Keyword: dmrc, metro, ppp,
Advertisements
  Plan a financially worry-free future for the family. Click here
  How can a bank be here for good? Know More
  Maximum Options of choicest properties. Buy Sell Rent.
  Take your family on fun filled vacation. know more.
  Invest in Gold Mutual Funds and ETFs online for FREE
  Plans for every business size and need. Explore your options
Bookmark and Share       Facebook Facebook   Add to Favorites Twitter  
Display Name  Email-Id  
Post your comment
Advertisements 
Plan a financially worry-free future for the family. Click here
How can a bank be here for good? Know More
Maximum Options of choicest properties. Buy Sell Rent.
Invest in Gold Mutual Funds and ETFs online for FREE
Take your family on fun filled vacation. know more.
Plans for every business size and need. Explore your options
  आपका मत
 क्या बीसीसीआई पर कसना चाहिए सरकार का शिकंजा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.