| सस्ती 'चमक' का धोखा | | सुशील मिश्र / मुंबई July 09, 2012 | | | | |
अगर कोई ज्वैलर आपको मंदी का हवाला देकर सस्ते में हीरा दे रहा है तो खबरदार हो जाइए क्योंकि असली हीरे के नाम पर वह आपको मानव निर्मित हीरा (मैनमेड डायमंड) थमा सकता है। देसी हीरा बाजार में पैठ बना रहे मैनमेड हीरों की पहचान बहुत मुश्किल है, जिसके कारण खरीदार धोखा खा रहे हैं। भारत में 2004 में ही सिंथेटिक डायमंड या नकली हीरों का चलन शुरू हो गया था। असली हीरे के मुकाबले बहुत कम कीमत में मिलने वाले नकली हीरों का इस्तेमाल शौकीन लोग खूब करते हैं। लेकिन तकनीकी विकास के साथ इन हीरों की गुणवत्ता भी सुधरी है, इसलिए अमेरिका से आए सिंथेटिक हीरे और असली हीरे में फर्क मुश्किल होता जा रहा है। इस सिंथेटिक हीरे को ही मैनमेड हीरा कहा जाता है।
रत्न एवं आभूषण निर्यात संवद्र्घन परिषद (जीजेईपीसी) के चेयरमैन राजीव जैन कहते हैं कि बेहद कम कीमत वाले सिंथेटिक हीरों का अलग बाजार है, ग्राहक उसे जानते हैं और कई साल से ऐसे हीरे खरीद रहे हैं। लेकिन असली हीरों के नाम पर सिंथेटिक या मैनमेड हीरे बेचना ग्राहकों के साथ धोखा करना है। इसीलिए हीरा खरीदने से पहले उसकी जांच अधिकृत प्रयोगशाला में कराने की अपील परिषद ग्राहकों से लगातार कर रही है।
हीरा माणिक ग्रुप के अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया के मुताबिक मंदी में माल नहीं बिकने और कर्ज चुकाने के लिए सस्ता माल बेचने के नाम पर कुछ कारोबारी ग्राहकों को मैनमेड हीरे से चूना लगा रहे हैं। असल में मैनमेड हीरे असली हीरे के मुकाबले 60 फीसदी सस्ते आते हैं। कारोबारी उनके साथ सर्टिफिकेट भी लगा देते हैं, जिस पर भरोसा कर और आधी कीमत देखकर ग्राहक फौरन उन्हें खरीद लेते हैं।
हीरों की सबसे बड़ी देसी मंडी पंचरत्ना के सचिव नरेश मेहता मैनमेड हीरों को इस कारोबार के वजूद पर खतरा बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैनमेड हीरों की पहचान प्रयोगशाला में भी मुश्किल से हो रही है क्योंकि उनमें कार्बन की मात्रा असली हीरे के बराबर रखी जाती है। दोनों में केवल कठोरता का फर्क है क्योंकि असली हीरे ज्यादा कठोर होते हैं। उन्होंने कहा कि मैनमेड हीरों के कारण ऐसी प्रयोगशालाओं का कारोबार तो बढ़ जाएगा, लेकिन बाजार का नाम बदनाम होगा। उन्होंने मोती के कारोबार का हवाला देते हुए कहा कि 50 साल पहले यह पूरे शबाब पर था, लेकिन कुछ कारोबारियों ने पैसा कमाने के लिए मैनमेड मोती उतार दिए। शुरू में सब सही रहा, लेकिन बाद में ग्राहकों को पता चल गया और यह कारोबार आज कमोबेश खत्म हो चुका है।
नाइन डायमंड के प्रबंध निदेशक संजय शाह के मुताबिक हीरे पर रिटर्न नहीं मिलना बहुत बड़ी खामी है। ग्राहक जब हीरा बेचने जाता है तो उसे आधी कीमत ही मिलती है। मैनमेड हीरों में तो एक पैसा भी नहीं मिलेगा, इसलिए सोने की हॉलमार्किंग की तरह हीरे के लिए भी मानक तय होने चाहिए।
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