| केतन की छाया से बाजार घबराया | | पलक शाह / मुंबई July 09, 2012 | | | | |
भारतीय शेयर बाजार में केतन पारेख के कारोबार करने पर करीब एक दशक पहले ही पाबंदी लग चुकी है। लेकिन उसका नाम आज भी दलाल पथ को जब-तब डराता रहता है। देश की खुफिया ब्यूरो (आईबी) की रिपोर्ट आने के बाद आज को छोटी और मझोली कंपनियों के शेयरों पर खासी बिकवाली का दबाव देखा गया। दरअसल, बाजार में केतन पारेख और गुजरात के एक अन्य ऑपरेटर राजू शाह या राजू बार्टर के नाम की चर्चा है।
दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन और गोयनका डायमंड के शेयर आज 14 से 20 फीसदी तक लुढ़क गए। इंडिया टुडे पत्रिका में शनिवार को आईबी की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी जिसमें कहा गया था कि इन कंपनियों के शेयरों में तेजी के पीछे केतन पारेख और बार्टर का हाथ होने की आशंका है। इस रिपोर्ट के बाद ऑर्किड केमिकल्स ऐंड फार्मास्युटिकल्स, आईवीआरसीएल, पैंटालून रिटेल, त्रिभुवनदास भीमजी जवेरी और जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्चर के शेयरों में भी भारी गिरावट देखी गई। हालांकि ज्यादातर कंपनियों ने इसमें केतन पारेख या बार्टर की किसी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। जीएमआर ने कहा, 'हम कड़े शब्दों में पूरी तरह इस आरोप को खारिज करते हैं। बाजार में हुई कथित गड़बड़ी में कंपनी या प्रबंधन की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भूमिका नहीं है।' दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉर्पोरेशन ने कहा, 'हम मीडिया में चल रही उन खबरों को खारिज करते हैं, जिसमें कुछ ब्रोकरों द्वारा शेयरों में की जा रही गड़बड़ी में कंपनी का नाम भी शामिल किया गया है। ऐसे करने वाले कथित ब्रोकरों के साथ उनका कोई लेना-देना नहीं है।'
इस मसले पर सेबी ने कहा, 'सेबी सरकारी एजेंसियों समेत सभी स्रोतों से मिली जानकारी पर कार्रवाई करता है। सेबी के पास मजबूत निगरानी तंत्र है। वित्त वर्ष 2011-12 में 74 मामलों की जांच पूरी की गई है। सेबी बाजार में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए हरसंभव कार्रवाई कर रहा है। '
पिछले 18 महीनों में यह दूसरा मौका है जब आईबी ने विभिन्न नियामकों को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेटरों का समूह इन कंपनियों के शेयरों की बिक्री के लिए कुछ बीमा कंपनियों के संपर्क में था। रिपोर्ट में ऑपरेटरों के गठजोड़ में एक नया नाम पियूष संपत का भी सामने आया है। इससे पहले 20 सितंबर 2010 को आईबी के तत्कालीन मुखिया राजीव माथुर ने रिपोर्ट सौंपी थी। उस समय विमल राठौड़, संजय डांगी, अशोक पोद्दार, मनीष मारवाह, दिनेश सिंघानिया, राज अग्रवाल और सी शिवशंकरन का नाम सामने आया था।
पारेख के एक निकट सहयोगी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पारेख ने मीडिया में आई आईबी की रिपोर्ट देखी है। लेकिन मीडिया में जो रिपोर्ट प्रकाशित हुई है उसमें कोई तर्क नहीं है। 2000 में माधवपुरा मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में संयुक्त संसदीय समिति ने पाया था कि इसमें केतन पारेख की भूमिका है, जिसके बाद 2003 में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने उसके शेयर बाजार में कारोबार पर पाबंदी लगा दी थी। माधवपुरा मर्केंटाइल ने दावा किया था कि उसने केतन पारेख को 1,000 करोड़ रुपये दिए थे लेकिन उसे केवल 400 करोड़ रुपये ही मिले। आईबी रिपोर्ट के मुताबिक ऑपरेटर गैर-कानूनी तरीके से काफी मात्रा में शेयरों की खरीद करते हैं, जिससे मंदी के दौरान भी शेयरों की कीमतें खासी चढ़ जाती हैं। लेकिन संस्थागत निवेश या आईपीओ के बाद वह शेयरों को बेच देते हैं जिससे उक्त कंपनी के शेयरों में खासी गिरावट आती है। बाजार के जानकारों का कहना है कि ये ऑपरेटर ब्रोकरों के साथ मार्जिन फंडिंग के जरिये शेयरों की खरीद करते हैं और हवाला के जरिये इसका निपटान करते हैं।
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