| किफायत के घर में ईसीबी पर अगर-मगर | | दिलाशा सेठ / July 08, 2012 | | | | |
किफायती मकानों के निर्माण के लिए बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) को मंजूरी देने की घोषणा बजट में बड़े जोर-शोर से कर दी गई मगर इस पर इस दिशा में अब तक कोई कदम नहीं उठाया जा सका है। सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के ऐसे लोग जिन्हें इस विषय की जानकारी है, उन्होंने बताया कि हाल फिलहाल तो इस योजना के अमल में लिए जाने की संभावना नहीं है। वजह है कि विदेशी मुद्रा की हेजिंग से जुड़े जोखिमों के लिए अब तक कोई हल नहीं ढूंढा जा सका है।
वित्त मंत्रालय को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ मिलकर ईसीबी शर्तों के लिए दिशानिर्देश तय करने हैं और इस संबंध में अधिसूचना जारी करनी है। हालांकि आवासीय एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि ईसीबी पर कोई देरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा, 'अगले बजट तक समय बचा है।' नैशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के मुताबिक किफायती मकानों को कीमतों के आधार पर परिभाषित किया जाना चाहिए इलाके के हिसाब से नहीं। नारेडको के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील दहिया ने कहा, '7 से 15 लाख रुपये की सभी परियोजनाएं ईसीबी के दायरे में आएंगी।'
आईटी कानून के 35 एडी के मुताबिक किसी परियोजना को तभी किफायती आवासीय परियोजना कहा जा सकता है अगर, 'परियोजना में किराये पर दिए जाने वाले कुल एरिया में कम से कम 90 फीसदी ईडब्लूएस (आर्थिक रूप से कमजोर तबके), एलआईजी और एमआईजी श्रेणियों के किफायती मकान हों और किराये पर देने लायक कम से कम 30 फीसदी क्षेत्रफल पर ईडब्लूएस श्रेणी के किफायती मकान बने हों।'
नैशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी) ईसीबी के लिए चैनल और नोडल एजेंसी का काम करेगा। बजट की घोषणा के बाद इसके चेयरमैन और प्रबंध निदेशक आर वी वर्मा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'एनएचबी की शीर्ष स्तरीय भूमिका है और एनएचबी को औसत ऋण आवंटन से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि आवासीय क्षेत्र को कोई जोखिम नहीं है।'
इस कदम पर अमल करने में सबसे बढ़ी दिक्कत विदेशी मुद्रा से जुड़े जोखिम को लेकर है। इन जोखिमों के खिलाफ डेवलपर्स के पास हेज फंडिंग की क्षमता नहीं है। नारडेको के दहिया ने कहा, 'अप्रैल की शुरुआत में हमने इस पर पहले दौर की चर्चा की थी। हमने फैसला किया कि विदेशी मुद्रा के उतार चढ़ाव से डेवलपरों को बचाने के लिए मध्यस्थ की जरूरत होगी। यहां आरबीआई मध्यस्थ हो
सकता है।' अप्रैल के बाद उद्योग को इस सिलसिले में किसी बैठक के बारे में सूचित नहीं किया गया है।
अप्रैल में वित्त मंत्रालय ने ऊर्जा, सड़क और विमानन जैसे बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में ईसीबी कदम को अमल में लाने का रास्ता साफ कर दिया था। ऐसा माना जा रहा है कि मंत्रालय को यह चिंता है कि ईसीबी रास्ते का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है और इस वजह से मजबूत सुरक्षात्मक कदम की आवश्यकता होगी। इन कदमों के तहत किफायती आवासीय परियोजनाओं के लिए एसक्रो खातों और किफायती मकानों के निर्माण के लिए रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा अंडरटेकिंग पर हस्ताक्षर करवाना शामिल है। बजट में की गई इस घोषणा पर अमल के लिए जरूरतों पर आवासीय एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय, नारडेको और एनएचबी चर्चा कर चुका है।
किफायती मकानों के लिए ईसीबी को मंजूरी या अधिसूचना में देरी की वजह से परियोजना की प्लानिंग में भी देरी हुई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक डेवलपर ने कहा, 'जब तक ईसीबी के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं आते हैं तब तक हम परियोजना की प्लानिंग नहीं कर सकते हैं।'
नारडेको के महानिदेशक आर आर सिंह ने कहा कि किफायती मकानों के लिए ईसीबी में दूरी की वजह इसमें कई पक्षों का जुड़ा होना है। सभी के साथ चर्चा और हर किसी को सहमत करने में समय लगता है।
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