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ऑयल इंडिया: कच्चा तेल नरम तो मिला दम
उज्ज्वल जौहरी /  July 08, 2012

ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) का शेयर 31 मई के 436 के अपने निचले स्तर से लगभग 15 फीसदी चढ़ चुका है। यह तेजी खासकर तेल एवं गैस कंपनियों के सब्सिडी भार में कमी की वजह से देखी गई है। यह भार वित्त वर्ष 2012 के 2,00,000 करोड़ रुपये की तुलना में घट कर 1,38,500 करोड़ रुपये के स्तर पर आंका जा रहा है। सरकार द्वारा डीजल कीमतों में वृद्घि की अनुमति दिए जाने की उम्मीद से भी धारणा मजबूत हुई है।
हालांकि एक तरफ जहां कंपनी कुछ राहत महसूस कर रही है वहीं अंडर रिकवरी के मोर्चे पर सब्सिडी विभाजन की व्यवस्था अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सरकार सब्सिडी विभाजन व्यवस्था पर काम कर रही है और सब्सिडी में वास्तविक भागीदारी वित्त वर्ष के अंत तक की स्पष्ट होगी। मार्च 2012 की तिमाही में अन्य अपस्ट्रीम कंपनियों में ऑयल इंडिया की भागीदारी बढ़ कर 16 फीसदी (पूर्व में 12 फीसदी से) रही। इससे इसकी सालाना सब्सिडी भागीदारी वित्त वर्ष 2012 में बढ़ कर 13.5 फीसदी हो गई जो वित्त वर्ष 2011 में 10.9 फीसदी थी और कंपनी द्वारा सब्सिडी विभागन को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। अच्छी बात यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की वजह से ऑयल इंडिया की संपूर्ण सब्सिडी भागीदारी वित्त वर्ष 2013 में गिर सकती है। व्यावसायिक मोर्चे पर, उत्पादन में अच्छी तेजी के साथ परिदृश्य मजबूत बना हुआ है।
सब्सिडी भार और अच्छे परिचालन प्रदर्शन को देखते हुए इस शेयर (फिलहाल 502 रुपये पर) के लिए एक वर्ष की कीमत लक्ष्य 543 रुपये पर है। हालांकि इससे आठ फीसदी की संभावित तेजी का संकेत मिलता है और इस नकदी संपन्न कंपनी द्वारा किसी बड़े अधिग्रहण या ईंधन कीमतों में वृद्घि (खासकर डीजल) से इस शेयर को मदद मिल सकती है। दूसरी तरफ इस शेयर पर आपूर्ति में बढ़ोतरी की वजह से एफपीओ के दौरान कुछ दबाव देखना पड़ सकता है।

सब्सिडी में कमी
वित्त वर्ष 2013 के लिए तेल कंपनियों का सब्सिडी भार अनुमान वर्ष के शुरू के 200,000 करोड़ रुपये के अनुमान की तुलना में 35 फीसदी तक घटा कर 1,29,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। सिटी के विश्लेषकों ने 19 जून की रिपोर्ट में 110 डॉलर प्रति बैरल पर कच्चे तेल की कीमत और डॉलर की तुलना में 54 पर रुपये की कीमत के हिसाब से 1,51,900 करोड़ रुपये के सब्सिडी भार का अनुमान व्यक्त किया है। हालांकि एचएसबीसी ग्लोबल रिसर्च के विश्लेषकों द्वारा 28 जून की रिपोर्ट में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल और रुपये के लिए 55 के स्तर के साथ वित्त वर्ष 2013 के लिए 1,29,700 करोड़ रुपये के सब्सिडी बोझ का अनुमान व्यक्त किया है। इस आधार पर और 40 फीसदी (51,880 करोड़ रुपये) की अपस्ट्रीम भागीदारी को देखते हुए सब्सिडी बोझ वित्त वर्ष 2013 में ऑयल इंडिया के लिए 7000 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है जो पिछले वित्त वर्ष के  7400 करोड़ रुपये की तुलना में कम है। एचएसबीसी के विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2014 और 2015 के दौरान कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल पर रहने का अनुमान व्यक्त किया है जिससे आने वाले वर्षों के दौरान सब्सिडी बोझ में और कमी लाने में मदद मिल सकती है।

अधिग्रहण पर नजर
ऑयल इंडिया की नकदी एवं निवेश रकम 31 मार्च 2012 को 13,568 करोड़ रुपये पर थी जिसका एक बड़ा हिस्सा किसी उत्पादक परिसंपत्ति या अन्वेषण से संबंधित क्षेत्र के अधिग्रहण में इस्तेमाल किए जाने की संभावना है। एचएसबीसी के विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी शेल गैस परिसंपत्तियों और विदेश में अन्य पारंपरिक परिसंपत्तियों की खरीदारी पर गंभीरता से विचार कर रही है।  उनका कहना है कि कंपनी अपस्ट्रीम परिसंपत्ति के अधिग्रहण पर 6000 करोड़ रुपये खर्च करने की संभावना तलाश रही है। यदि कंपनी इसमें सफल रहती है तो उसके राजस्व और मुनाफे में त्वरित रूप से मजबूती आएगी। एशियन मार्केट सिक्योरिटीज के सुजीत लोढा कहते हैं कि अधिग्रहण इस शेयर के लिए एक प्रमुख कारक होगा।

मजबूत उत्पादन
ऑयल इंडिया के उत्पादन की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। जहां वित्त वर्ष 2012 में इसका कच्चे तेल और गैस का उत्पादन वित्त वर्ष 2011 की तुलना में 7.2 फीसदी और 11.9 फीसदी बढ़ा, वहीं इसके पांच वर्षीय तेल एवं गैस उत्पादन में 3.1 फीसदी की सीएजीआर पर वृद्घि दर्ज की गई है और यह रुझान बरकरार रहने की संभावना है। एचएसबीसी के विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का तेल उत्पादन अगले तीन वर्षों के दौरान 3.4 फीसदी की सीएजीआर से बढ़ेगा और उसका गैस उत्पादन मौजूदा 5.8 एमएमएससीएमडी से बढ़ कर वित्त वर्ष 2014 और वित्त वर्ष 2015 के दौरान क्रमश: 5.9 एमएमएससीएमडी और 6 एमएमएससीएमडी रहेगा।

दीर्घावधि बढ़त
गैस कीमतों में वृद्घि, खासकर दीर्घावधि के संदर्भ में लाभदायक होगी। बैंक ऑफ अमेरिका-मेरिल लिंच के विश्लेषकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रिलायंस अप्रैल 2014 से पहले केजी डी6 गैस कीमतों में वृद्घि करना चाहती है। हालांकि अप्रैल 2014 से पहले कीमत वृद्घि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन अप्रैल 2014 में वृद्घि अनिवार्य है।
केजी डी6 गैस की कीमत बढऩे पर ओएनजीसी और ऑयल इंडिया द्वारा उत्पादित एडमिनिस्टर्ड प्राइसिंग मैकेनिज्म (एपीएम) गैस की कीमत भी बढ़ सकती है।

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