| सरकारी बॉन्डों की नीलामी से पहले रुपये को दम | |
| बीएस संवाददाता / मुंबई 07 03, 2012 | | | | |
सरकारी बॉन्डों की नीलामी से एक दिन पहले ही विदेशी फंड का प्रवाह बढऩे से पिछले चार दिनों के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये में तकरीबन 5 फीसदी की मजबूती आई है। साथ ही नीति निर्माताओं की ओर से अर्थव्यवस्था में सुधार के आश्वासन से भी भारतीय परिसंपत्तियों में निवेशकों की जोखिम वहन करने की धारणा को बल मिला है। हालांकि रुपये में तेजी का यह रुख आगे भी बना रहेगा, इस बारे में बाजार के भागीदारों में मतभेद है। कुछ का कहना है कि रुपये में यह तेजी लंबे समय तक बनी नहीं रह सकती, वहीं कुछ इसके प्रति आशावादी नजरिया अपना रहे हैं। मंगलवार को रुपया 2 फीसदी तेजी के साथ सात हफ्तों के उच्च स्तर 54.37 पर बंद हुआ।
ऐक्सिस बैंक में ट्रेजरी और इंटरनैशनल बैंकिंग के अध्यक्ष पार्थसारथि मुखर्जी ने कहा, 'सरकार की ओर से सकारात्मक बयान आने के बाद से निवेशकों की धारणा में बदलाव आया है।' उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते जनरल एंटी अवॉयडेंस रूल्स (गार) पर सरकार के स्पष्टीकरण और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का वित्त मंत्रालय का प्रभार संभालने से भी अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है।
इसके साथ ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड की ओर से सरकारी बॉन्डों की नीलामी की खबर से रुपये को बल मिला है। सरकारी बॉन्डों में विदेशी निवेश की सीमा 15 अरब डॉलर से बढ़ाकर 20 अरब डॉलर किया गया है। डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये को सहारा देने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। अदाणी पावर के मुख्य वित्त अधिकारी प्रबल बनर्जी ने कहा, 'वैश्विक मोर्चे पर भी कुछ सकारात्मक खबरें आ रही हैं। कच्चे तेल, कोयला और अन्य जिंसों के भाव घट रहे हैं। यूरो क्षेत्र में स्थिरता आ रही है। भारत में विदेशी संस्थागत निवेश पर डेट और इक्विटी में बेहतर रिटर्न भी मिल रहा है। इसके चलते देश में विदेशी फंड का प्रवाह बढ़ रहा है। उम्मीद है कि रुपया बहुत जल्द 50 के स्तर पर आ जाएगा।'
हालांकि जीवीके समूह के ग्रुप सीएफओ आईजैक जॉर्ज का कहना है कि अगर सरकार आर्थिक सुधारों पर ध्यान नहीं देती है, जिसकी बाजार को सख्त जरूरत है तो यह तेजी लंबे समय तक नहीं रह पाएगी। उन्होंने कहा कि देश को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की जरूरत है। अगर सरकार सही दिशा में आगे बढ़ती है तो इसमें कोई शक नहीं कि रुपया एक बार फिर से 46 के स्तर पर आ जाएगा। हाल के हफ्तों में रुपया अपने सर्वाधिक निचले स्तर 57.33 पर पहुंच गया था। लेकिन घरेलू और वैश्विक मोर्चे पर बेहतर खबरों से रुपये में करीब 5 फीसदी की मजबूती आई है। गुरुवार से सोमवार तक घरेलू शेयर बाजारों और डेट में करीब 4,628 करोड़ रुपये के फंड का प्रवाह हुआ है। मंगलवार को बंबई स्टॉक एक्सचेंज में निवेशकों ने 580 करोड़ रुपये का निवेश किया।
एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ ने कहा, 'अगले कुछ हफ्तों तक रुपये में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है और 53.50 से 54.50 के दायरे में आने पर इसमें स्थिरता देखी जा सकती है।'
6 प्रमुख विदेशी मुद्राओं की तुलना में डॉलर सूचकांक मंगलवार को 81.87 से गिरकर 81.76 पर पहुंच गया। पिछले महीने डॉलर सूचकांक 83 के स्तर तक पहुंच गया था। इंडियन फॉरेक्स एडवाइजर्स के विश्लेषकों का कहना है कि अभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। रुपये की स्थिति के बारे में आकलन के लिए कम से कम इस हफ्ते तक भारतीय मुद्रा की चाल पर नजर रखनी होगी।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक रुपया डॉलर के मुकाबले 50 के स्तर पर पहुंच सकता है। हालांकि इसके लिए जरूरी है कि चालू खाता घाटा कम हो और विदेशी फंड का प्रवाह बढ़े।
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