केंद्र की ओर से राहत पैकेज के मुद्दे पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के बाद पश्चिम बंगाल की वित्तीय स्थिति और खराब हो सकती है।
दरअसल ईस्ट वेस्ट मेट्रो कॉरीडोर प्रोजेक्ट के भारतीय रेल को स्थानांतरित किए जाने पर अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है क्योंकि जापानी बैंक इस पहल के खिलाफ है। रेलवे को हिस्सेदारी स्थानांतरित होने से कर्ज में डूबे पश्चिम बंगाल 1300 करोड़ रुपये की बचत कर पाता।
जापान इंटरनैशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) को 4874 करोड़ रुपये की परियोजना में 45 फीसदी का भुगतान करना था लेकिन माना जा रहा है कि केंद्र द्वारा भारतीय रेल को परियोजना की पूरी जिम्मेदारी देने का एजेंसी ने विरोध किया है। कोलकाता मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (केएमआरसी) इस परियोजना का विकास कर रही है जो सॉल्ट लेक को हावड़ा से जोड़ेगी।
केएमआरसी केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और पश्चिम बंगाल सरकार का संयुक्त उद्यम है। पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय दोनों की केएमआरसी में क्रमश: 30 और 25 फीसदी हिस्सेदारी है। परियोजना पर आने वाला बाकी 45 फीसदी खर्च जापानीज बैंक ऑफ इंटरनैशनल कॉर्पोरेशन (जेबीआईसी) से कर्ज के तौर पर लिया गया था। जेबीआईसी अब जेआईसीए का हिस्सा है।
पिछले साल इस बारे में सिद्धांत रूप से सहमति बनी थी कि राज्य सरकार और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय परियोजना में अपनी-अपनी हिस्सेदारी रेल मंत्रायल को दे देंगे। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन पर नजर रखने वाले लोगों मानना था कि केंद्र ने ममता बनर्जी का खुश करने के लिए ऐसा किया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जेआईसीए इस कदम के खिलाफ है।
इस बारे में एक अधिकारी ने कहा, ' जेआईसीए रेलवे को हिस्सेदारी सौंपने के खिलाफ है। मैं वास्तविक कारण पर टिप्पणी नहीं कर सकता लेकिन कोलकाता मेट्रो की खराब वित्तीय हालत इसकी वजह हो सकती है।'
इसी बारे में जब शहरी विकास मंत्रालय के सचिव एवं केएमआरसी के चेयरमैन सुधीर मिश्रा ने कहा, 'मैं केवल इतना कह सकता हूं कि हम सबों की तरह ही जेआईसीए भी चाहती है कि परियोजना का काम समय पर पूरा हो सके।' हिस्सेदारी सौंपे जाने के बारे में उन्होंने कहा, 'मामला अब भी विचाराधीन है।' इसी बारे में जेआईसी को भेजा गया ई-मेल अनुत्तरित रहा।
मौजूदा वित्तीय स्थिति के अनुसार परियोजन में राज्य का कुल योगदान 1452.58 करोड़ रुपये है। इसका तात्पर्य यह है कि अगर रेलवे हिस्सेदारी अपने नियंत्रण में नहीं लेता है तो बंगाल सरकार को मेट्रो परियोजना के लिए 1306.08 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
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