| कच्चे तेल में नरमी से तेल विपणन कंपनियों को मिलेगी मजबूती | | उज्ज्वल जौहरी / July 01, 2012 | | | | |
कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 25 फीसदी की गिरावट से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनियों को राहत मिली है। कच्चे तेल की कीमतें अप्रैल के 125 डॉलर प्रति बैरल से घट कर 91 डॉलर पर आ गई हैं। कंपनियों को रुपये में गिरावट के बावजूद अंडर-रिकवरी में बड़ी कमी आने की उम्मीद है जिससे कार्यशील पूंजी पर दबाव घट सकता है। यही वजह है कि इनकी शेयर कीमतें हाल के समय में प्रमुख बाजारों की तुलना में नीचे आई हैं।
हालांकि अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम दोनों तरह की कंपनियां लाभान्वित हुई हैं, लेकिन डाउनस्ट्रीम तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) फिलहाल पेट्रोल कीमतों में तेज वृद्घि की वजह से अधिक लाभान्वित हो रही हैं। सकल प्राप्तियों की तुलना में शुद्घ क्रूड प्राप्तियों पर आधारित कर की गणना के लिए ताजा सिफारिशों से हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) को अतिरिक्त राहत मिली है। डीजल (अल्पावधि में संभावित), केरोसिन या एलपीजी के लिए कीमत वृद्घि पर सरकार द्वारा अन्य कोई फैसला इन कंपनियों को बड़ी राहत प्रदान कर सकता है। ओएमसी में शामिल बीपीसीएल अपने मजबूत अन्वेषण एवं उत्पादन (ईऐंडपी) पोर्टफोलियो की वजह से पसंदीदा शेयर बना हुआ है।
अंडर-रिकवरी
हालांकि विभिन्न विश्लेषकों ने वर्ष 2013 के लिए अंडर-रिकवरी विभिन्न स्तरों पर रहने का अनुमान लगाया है जो उनके कच्चे तेल एवं रुपये के अनुमानों पर आधारित है। सभी अनुमान वित्त वर्ष 2012 (115 डॉलर की औसतन तेल कीमत और 48 की रुपया-डॉलर दर) के दौरान दर्ज की गई 1,38,500 करोड़ रुपये की सकल अंडर-रिकवरी की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक हैं। कच्चे तेल की कीमतों में कटौती के साथ रुपये में गिरावट के बावजूद अनुमान में भारी कमी देखी गई है।
उदाहरण के लिए, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने अपने अनुमान को साल के शुरू के 200,000 करोड़ रुपये से घटा कर अब 1,52,000 करोड़ रुपये कर दिया है। सिटी के विश्लेषकों ने भी अंडर-रिकवरी अनुमान को घटा कर 1,52,000 करोड़ रुपये कर दिया है, जो औसतन 110 डॉलर प्रति बैरल की कच्चे तेल की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये (54 पर) में गिरावट पर आधारित है।
पेट्रोल कीमतों में वृद्घि
तेल विपणन कंपनियों द्वारा 23 मई को पेट्रोल कीमतों में वृद्घि से पेट्रोल की बिक्री पर मुनाफा अर्जित करने में मदद मिली है जबकि हाल के समय में उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। पेट्रोल को औपचारिक रूप से नियंत्रण-मुक्त किए जाने के बावजूद सरकार ने चुनावों की वजह से और फिर संसद के बजट सत्र की वजह से तेल विपणन कंपनियों को कीमतें बढ़ाने की अनुमति नहीं दी। विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में कटौती के साथ ओएमसी पेट्रोल पर 4-5 रुपये प्रति लीटर का मुनाफा कमा रही हैं। हालांकि पेट्रोल कीमतों में कुछ कमी की बात चल रही है, लेकिन आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि तेल विपणन कंपनियों द्वारा अप्रैल-मई के दौरन हुए 2300 करोड़ रुपये के नुकसान (कीमत वृद्घि से पहले) की भरपाई किए जाने के बाद ही कीमतों में नरमी देखी जा सकती है।
बीपीसीएल और एचपीसीएल को बढ़त
तेल विपणन कंपनियों में एचपीसीएल को उसकी रिफाइनिंग क्षमताओं की तुलना में मजबूत विपणन कारोबार को देखते हुए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का अधिक फायदा मिलना चाहिए। इसके अलावा सरकार के पेट्रोलियम प्लानिंग एवं एनालिसिस सेल द्वारा कच्चे तेल की सकल प्राप्तियों की तुलना में कच्चे तेल की शुद्घ प्राप्तियों पर आधारित ओएनजीसी के ऑक्ट्रोई शुल्क की गणना में बदलाव के लिए सिफारिशों के संबंध में बातचीत से एचपीसीएल और बीपीसीएल की शेयर कीमतें हाल के दिनों में चढ़ी हैं।
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