| बीएचईएल: थोड़ी राहत, ज्यादा मुश्किल | | विश्लेषकों को खराब व्यावसायिक हालात की वजह से इस शेयर की रेटिंग में कमी की आशंका नजर आ रही है। कंपनी के एफपीओ ऑफर के लिए भी राह चुनौतीपूर्ण हो सकती है। | | | प्रिया कंसारा पंड्या / July 01, 2012 | | | | |
सरकारी कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) का शेयर मूल्यांकन अपने सर्वाधिक निचले स्तर पर रहने और विद्युत उपकरण पर आयात शुल्क थोपे जाने के बावजूद कंपनी का एफपीओ ऑफर उत्साहजनक प्रतिक्रिया पैदा करने में विफल रह सकता है। सरकार ने बाजार पूंजीकरण के संदर्भ में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी और विनिवेश के लिए 15 सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (एनएमडीसी के बाद) में शामिल बीएचईएल की 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई है।
भारतीय बॉयलर-टर्बाइन-जेनरेटर (बीटीजी) उद्योग चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है और देश की सबसे बड़ी विद्युत उपकरण निर्माता बीएचईएल को हाल के वर्षों में स्थानीय एवं वैश्विक कंपनियों दोनों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सेक्टर के परिदृश्य में सुधार नहीं आता है तो आने वाले वर्षों में वित्तीय प्रदर्शन पर दबाव बढ़ जाएगा। यही वजह है कि वित्त वर्ष 2013 की अनुमानित आय के 8.6 गुना के ऐतिहासिक रूप से कम मूल्यांकन के बावजूद ज्यादातर विश्लेषक इस शेयर को लेकर उत्साहित नहीं हैं।
ऐंजल ब्रोकिंग के विश्लेषक राहुल कॉल कहते हैं, 'घटते ऑर्डर प्रवाह से बीएचईएल के दीर्घावधि विकास परिदृश्य पर दबाव पड़ा है। इसलिए आकर्षक मूल्यांकन का असर भी काफी हद तक कम हुआ है।'
मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज (एमओएसएल) के विश्लेषक सत्यम अग्रवाल कहते हैं, 'विद्युत क्षेत्र में धूमिल पड़ रहे बाहरी परिवेश की वजह से वित्त वर्ष 2013/14 में हमारे ऑर्डर भागीदारी अनुमान में संभावित कमी जैसे कारकों से रेटिंग घटने की आशंका से बीएचईएल का मूल्यांकन दबाव में बना हुआ है।' ब्लूमबर्ग के अनुसार जून में 10 विश्लेषकों की रेटिंग में पांच ने इस शेयर को सेल/अंडरवेट रेटिंग दी और चार ने 182 रुपये से 224 रुपये की कीमत लक्ष्य के साथ न्यूट्रल/होल्ड रेटिंग दी। सिर्फ एक विश्लेषक ने इस शेयर के लिए 264 रुपये के कीमत लक्ष्य के साथ खरीदारी रेटिंग दी।
चिंता बरकरार
पिछली कई तिमाहियों में अधिकतर में अपने मुनाफे को बरकरार रखने में सफल रही है। लेकिन अब कई तरह के बदलाव आए हैं और विश्लेषकों को बीएचईएल की बिक्री और मुनाफे पर दबाव पडऩे का अनुमान है, क्योंकि इस क्षेत्र को निष्पादन से जुड़ी समस्याओं, बढ़ती प्रतिस्पर्धा मूल्य निर्धारण ताकत में कमी आदि की वजह से सुस्ती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि कंपनी द्वारा कच्चे माल के सफल प्रबंधन और स्थिर कर्मचारी लागत की वजह से दबाव में कुछ कमी आ सकती है।
बीएचईएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक बी पी राव ने कंपनी के वित्तीय परिणाम घोषित (पिछले महीने) होने के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा, 'यदि आप सेगमेंट के हिसाब से परिणामों को देखते हैं, जिसमें मौजूदा तिमाही (मार्च 2012) शामिल है, तो उद्योग सेगमेंट में विद्युत सेगमेंट की तुलना में बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं।'
ऑर्डर बुक
मार्च 2012 के अंत में 1,34,700 करोड़ रुपये पर कंपनी की ऑर्डर बुक सालाना आधार पर 18 फीसदी तक कम है, क्योंकि ऑर्डर प्रवाह 64 फीसदी तक घट कर 22,100 करोड़ रुपये रह गया। परिणामस्वरूप राजस्व संभावना (बिक्री के मुकाबले ऑर्डर बुक) वित्त वर्ष 2011 के 3.9 गुना से घट कर वित्त वर्ष 2012 में 2.8 गुना रह गई है।
एमओएसएल के अग्रवाल कहते हैं, 'विद्युत क्षेत्र की कई परियोजनाओं के लिए 3.5 से 4 वर्षों की निष्पादन अवधि को देखते हुए रेशियो अब प्रतिकूल दायरे में है और राजस्व पर दबाव बढ़ेगा।' एचडीएफसी सिक्योरिटीज (रिटेल रिसर्च) के विश्लेषक सिजी ए फिलिप कहते हैं, 'यदि वित्त वर्ष 2012 में नए ऑर्डरों की भागीदारी में ठहराव बना रहता है तो बीएचईएल का प्रदर्शन वित्त वर्ष 2014 और इसके बाद भी प्रभावित होने की आशंका है।'
ऐंजल ब्रोकिंग के कौल कहते हैं, 'विभिन्न चुनौतियों को देखते हुए मौजूदा आर्थिक परिदृश्य सतत प्रवाह के लिए अनुकूल नहीं है।' एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सिजी के अनुसार, 'बीटीजी सेगमेंट अपेक्षाकृत लंबे मंदी चक्र में है, जैसा कि यह 1999-2003 में था। ईंधन आपूर्ति और बिजली से जुड़े मूल्य निर्धारण की वजह से इसके पुनर्जीवित होने में कुछ वक्त लगेगा।'
मूल्यांकन
इस शेयर ने 18 मई को 197.8 रुपये का 52 सप्ताह का निचला स्तर छुआ था और अब यह 20 गुना के पांच वर्षीय औसत से नीचे कारोबार कर रहा है। हालांकि विद्युत उपकरण पर आयात शुल्क थोपे जाने से बीएचईएल जैसी कंपनियों को मध्यावधि में कुछ हद तक मदद मिल सकती है, लेकिन इसका बड़ा फायदा 13वीं पंचवर्षीय योजना की अवधि के लिए विद्युत उपकरणों के लिए ऑर्डर शुरू होने पर ही मिलने की संभावना है। वह भी, उचित मुनाफा मार्जिन पर बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की बीएचईएल की क्षमता पर निर्भर करेगा।
हालांकि निवेशकों के लिए इस कंपनी से जुड़ी कुछ अच्छी बातें भी हैं जिनमें 2.9 फीसदी की लाभांश प्रााप्ति और कंपनी की मजबूत नकदी (मार्च 2012 में 6,672 करोड़ रुपये) स्थिति।
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