| जोखिम लें जान, फिर निवेश पर ध्यान | | निवेश से पहले अपेक्षित प्रतिफल का लक्ष्य तय करें और लगातार नजर बनाए रखें | | | आशिष पई / July 01, 2012 | | | | |
जब कोई निवेश की पहल करता है तो वह इससे जुड़े जोखिम का भी विश्लेषण करता है। लेकिन जोखिम के मुकाबले प्रतिफल की तुलना करना लोग अक्सर भूल जाते हैं। अगर कोई निवेशक तुलना करता है तो भविष्य में प्रतिफल और निवेश से संबंधित फैसले कर पाने में सफल होता है। जोखिम-प्रतिफल की संकल्पना सभी प्रकार के निवेश के लिए समान होती है। लेकिन कई ऐसे निवेशक हैं जो यह नहीं समझ पाते कि अपने पोर्टफोलियो में जोखिम-प्रतिफल की संकल्पना को किस तरह लागू करें।
अगर आप भी उन निवेशकों की श्रेणी में शामिल हैं तो निम्रलिखित बातों पर ध्यान दें। निवेश पर आपको अपेक्षित प्रतिफल नहीं मिलने की भी आशंका होती है। निवेश करने पर आप जो जोखिम उठाते हैं उससे प्रतिफल की भी उम्मीद जरूर करते हैं। आम तौर पर आप जितना अधिक जोखिम लेते हैं उसी हिसाब से आपको प्रतिफल भी मिलना चाहिए। इसी तरह, अगर जोखिम कम है तो प्रतिफल भी उसी हिसाब से कम रहना चाहिए।
जोखिम लेने की क्षमता का करें विश्लेषण
हरेक व्यक्ति की जोखिम लेने की क्षमता अलग-अलग होती है। ऐसा कोई मॉडल नहीं है जो इस मामले में सभी पर लागू होता है। आप कितना जोखिम ले सकते हैं इसका निर्धारण दो तरह से किया जा सकता है:
समय सीमा: निवेश करने से पहले यह जरूर जान लें कि आप कितने समय के लिए निवेश करना चाहते हैं। मान लें कि आपके पास निवेश के लिए 5 लाख रु पये हैं और आप एक साल के लिए निवेश करना चाहते हैं तो फिर शेयरों या जिंसों में निवेश न करेंं। इसकी एक मात्र वजह यह है कि निवेश के ये साधन जोखिम भरे होते हैं।
अनिश्चितता की हालत में आप कम कीमतों पर शेयर बेचने को मजबूत हो सकते हैं। ऐसे में अगर निवेश की अवधि छोटी है तो आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। निवेश की समय सीमा लंबी होने से आपको नुकसान की भरपाई करने का भी पर्याप्त समय मिलता है।
जोखिम सहने की क्षमता: आप किस हद तक नुकसान उठा सकते हैं, इससे भी आपके जोखिम सहने की क्षमता का पता लगता है। आप अधिक जोखिम वाले साधनों में तभी निवेश कर सकते हैं जब आप पूंजी नुकसान सहने के लिए तैयार हैं। आपके पास जितनी अधिक रकम होगी आप जोखिम भी उतना ही लेंगे। उदाहरण के लिए एक व्यक्ति के पास 5 लाख रुपये हैं और दूसरे व्यक्ति के पास 50 लाख रुपये हैं। दोनों अगर 1 लाख रुपये प्रतिभूति में निवेश करते हैं तो निवेश का क्षय होने की स्थिति में कम परिसंपत्ति वाले के मुकाबले में अधिक रकम वाले को कम नुकसान होगा।
निवेश जोखिम पिरामिड
अपनी जोखिम लेने की क्षमता का पहचान कर आप परिसंपत्ति संतुलित करने के लिए आप जोखिम पिरामिड विधि का इस्तेमाल कर सकते हैं। निवेशक के पोर्टफोलियो को प्रदर्शित करने वाला पिरामिड तीन विभिन्न स्तरों में दिखाया गया है।
आधार स्तर: इसमें ऐसे निवेश हैं जिनके साथ जोखिम कम है और इनमें निवेश पर प्रतिफल की संभावना स्पष्टï दिखाई दे रही है। आपकी परिसंपत्ति का यह सबसे बड़ा हिस्सा होना चाहिए।
बीच का स्तर: इसमें मध्यम जोखिम वाले निवेश हैं जो अधिक प्रतिफल देते हैं।
ऊपर का स्तर: यह अधिक जोखिम वाले निवेश के लिए है। यह सबसे छोटा हिस्सा है। इनमें निवेश की जाने वाली रकम रकम ऐसी होनी चाहिए जिसे समय से पहले आपको निकालने की जरूरत महसूस नहीं हो।
जोखिम-प्रतिफल प्रोफाइल
आपकी जोखिम लेने की क्षमता का निर्धारण आपकी उम्र, वित्तीय लक्ष्य, निवेश पोर्टफोलियो का मूल्य आदि के जरिये होता है। सेवानिवृत्ति की ओर बढ़ रहा व्यक्ति कम जोखिम लेना पसंद करेगा वहीं कोई युवा व्यक्ति अधिक जोखिम लेने की जहमत उठा सकता है।
निवेश के बारे में जानकारी रखने वाला निवेशक न केवल निवेश के साधनों पर शोध करता है बल्कि अपनी वित्तीय स्थिति और प्रोफाइल पर भी नजर रखता है। अपेक्षित प्रतिफल के लिए कर बचत के पहलू पर भी ध्यान देना चाहिए। बैंक डिपॉजिट, डाक घर, गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर, बॉन्ड से आदि से प्राप्त आय कर योग्य होते हैं और कर दायरे के अनुसार करोपरांत प्रतिफल कम होता है। शेयर से मिलने वाले लाभांश कर मुक्त होते हैं और इसी तरह लंबी अवधि के पूंजी लाभ पर भी कर नहीं लगता है। हालांकि कर दायरे के अनुसार छोटी अवधि के पूंजी लाभ पर कर लगता है।
लेखक स्वतंत्र लेखन करते हैं।
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