| बेंचमार्क को पछाडऩे में संघर्ष कर रहे म्युचुअल फंड | | एन सुंदरेश सुब्रमण्यन / नई दिल्ली June 29, 2012 | | | | |
पिछले हफ्ते भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन यू के सिन्हा ने कहा था कि बाजार नियामक म्युचुअल फंड कंपनियों की खिंचाई करने से परहेज नहीं करेगा जिनकी ज्यादातर योजनाएं बेंचमार्क के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन कर रही हैं। सिन्हा ने कहा था कि उन्होंने कुछ ऐसी फंड कंपनियों की पहचान कर ली है जिनकी योजनाएं पिछले तीन साल से लगातार कमजोर प्रदर्शन कर रही हैं।
म्युचुअल फंड कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखने वाली एजेंसी वैल्यू रिसर्च के 35 फंड कंपनियों की 240 योजनाओं के तीन साल के प्रदर्शन आंकड़ों का बिजनेस स्टैंडर्ड ने विश्लेषण किया जिसमें पता चला कि कम से कम पांच फंड कंपनियों की सभी योजनाएं अपने संबंधित बेंचमार्क से प्रदर्शन के मामाले में पीछे चल रही हैं। सात म्युचुअल फंडों की आधी से अधिक इक्विटी डाइवर्सिफाइड योजनाएं पिछले तीन साल से अपने संबंधित बेंचमार्क के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन कर रही हैं। जिन फंड कंपनियों के प्रदर्शन का रिकॉर्ड पूरी तरह खराब रहा है उनमें एलआईसी नोमुरा, डॉयचे, जेएम फाइनैंशियल, बीओआई एक्सा और बड़ौदा पॉयनियर हैं। एलआईसी नोमुरा की 10 योजनाओं का अपने बेंचमार्क के मुकाबले प्रदर्शन कमजोर रहा जबकि जे एम फाइनैंशियल और डॉयचे की चार योजनाओं का प्रदर्शन कमजोर रहा।
जिन फंड कंपनियों की 50 फीसदी से अधिक योजनाएं घाटे में रहीं उनमें एलऐंडटी म्युचुअल फंड, सहारा और टॉरस शामिल हैं।
आईडीएफसी, प्रिंसिपल, एस्कॉट्र्स और मॉर्गन स्टैनली ऐसी फंड कंपनियां रहीं जिनकी आधी योजनाओं का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले खराब रहा जबकि आधी बेंचमार्क की तुलना में बेहतर करने में सफल रहीं।
एचएसबीसी एमएफ और एसबीआई आईएमएफ की 40 फीसदी योजनाओं का हाल बुरा रहा। सकारात्मक पहलू पर गौर करें तो नौ फंड कंपनियों की सभी योजनाओं ने 20 जून को समाप्त हुई तीन साल की अवधि में बेंचमार्क के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। इनमें आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, कोटक, रेलिगेयर और बीएनपी पारिबा, एडलवाइस और फिडेलिटी शामिल हैं। फिडेलिटी इंडिया की योजनाओं के एलऐंडटी द्वारा अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। विश्लेषकों का मानना है कि फंड कंपनियों ने फंड उद्योग के भीतर और बाहर की परिस्थितियों के प्रति जिस तरह प्रतिक्रिया दिखाई है वही फंड योजनाओं के मिले-जुले प्रदर्शन का कारण है। प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) की एक ताजा रिपोर्ट 'इज देयर ए सिल्वर लाइनिंग?' के अनुसार, 'पिछले दो साल से बाजार की खराब हालत की वजह से निवेशकों ने 2010-11 में 49,406 करोड़ रुपये और 2011-12 में 22,023 करोड़ रुपये की निकासी की है।'
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