| मूडीज की नजर में भारत की साख स्थिर | | भाषा / नई दिल्ली June 25, 2012 | | | | |
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में गिरावट के बावजूद वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत का साख परिदृश्य स्थिर स्तर पर कायम रखा है। मूडीज इन्वेस्टर सर्विस ने एक बयान में कहा, 'भारत के साख परिदृश्य को स्थिर पर कायम रखा जा रहा है। साख से संबंधित तमाम चुनौतियों मसलन कमजोर वित्तीय राजकोषीय प्रदर्शन, महंगाई तथा अनिश्चित निवेश नीति वातावरण आदि भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष दशकों से हैं और इन्हें पहले ही मौजूदा बीएए3 रेटिंग में शामिल किया जा चुका है।'
इसके साथ ही मूडीज ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को हाल में जिन नकारात्मक परिस्थितियों मसलन वृद्धि दर में गिरावट, निवेश की रफ्तार में कमी और खराब कारोबारी धारणा आदि भारतीय अर्थव्यवस्था में स्थाई यहां तक कि मध्यावधि में भी बनी नहीं रहेंगी। इससे पहले दो प्रमुख एजेंसियों स्टैंडर्ड एंड पूअर्स तथा फिच ने इससे पहले भारत की साख परिदृश्य को नकारात्मक कर दिया है।
रुपये में हाल में आई तेज गिरावट के बारे में मूडीज ने कहा है कि इससे सरकार का ऋण के निपटान का बोझ बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा है। सरकार का विदेशी मुद्रा ऋण उसके कुल कर्ज का सिर्फ 5.3 फीसदी है और यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.8 फीसदी के बराबर है। मूडीज ने कहा है कि रुपये में गिरावट से सरकार पर ऋण की अदायगी का बोझ बहुत अधिक नहीं बढ़ेगा, खासकर यह देखते हुए कि सरकार का ज्यादातर विदेशी ऋण बहुपक्षीय और द्विपक्षीय ऋणदाताओं से लिया गया है, जिस पर सालाना भुगतान काफी कम बैठता है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि सरकार का ऋण और राजकोषीय घाटा अनुपात हमेशा से अपने समकक्षों से खराब रहा है। उसका सरकार की कमजोर वित्तीय ताकत का आकलन सिर्फ इस अनुपात के आधार पर नहीं है। मूडीज ने कहा कि यह इस बात पर निर्भर है कि राजकोषीय नीति किस प्रकार बेहद ऊंची विविधीकृत, गरीब और असमानता वाले समाज सामाजिक स्थिरता कायम रखने में भूमिका निभाती है। इससे सरकार की राजस्व की क्षमता सीमित हो जाती है और उसके खर्च का बोझ बढ़ जाता है।
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