| फिर कसे विनिवेश के पेच | |
| संतोष तिवारी / नई दिल्ली 06 24, 2012 | | | | |
चालू वित्त वर्ष में सरकार का विनिवेश कार्यक्रम तेजी पकडऩे जा रहा है। इस कवायद को तेज करने के लिए सरकार जुलाई के दूसरे पखवाड़े में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आइपीओ) पेश करने जा रही है। साथ ही कई दूसरी आधा दर्जन सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू करने को लेकर परामर्श प्रक्रिया शुरू होगी।
विनिवेश विभाग (डीओडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि गुरुवार को हुई एक बैठक में तय किया गया कि आरआईएनएल के आईपीओ के लिए जुलाई के तीसरे या चौथे हफ्ते में कोई तारीख तय की जाए। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही कई दूसरी सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के लिए कैबिनेट की मंजूरी के लिए परामर्श प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इनमें सेल, नालको, बीएचईएल, हिंदुस्तान कॉपर, नेयवेली लिग्नाइट, राष्ट्रीय केमिकल्स लिमिटेड और ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं।
बाजार में उतार-चढ़ाव वाले हालात को देखते हुए मर्चेंट बैंकरों ने आरआईएनएल के आईपीओ को टाल दिया। बाजार में इसके पेश होने की तारीख 3 जुलाई तय की गई थी जिसके बाद चालू वित्त वर्ष में विनिवेश की गाड़ी आगे बढ़ती। आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने जनवरी में आरआईएनएल में विनिवेश के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई थी और सरकार अपनी शत प्रतिशत हिस्सेदारी वाली इस कंपनी में 10 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री से 2,500 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। विनिवेश विभाग के अधिकारी ने बताया कि नालको, एनएचपीसी, एनएमडीसी, एमओआईएल और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) जैसी कंपनियों में भी 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचने को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
वित्त मंत्रालय द्वारा पूरे वित्त वर्ष के लिए तैयार कार्ययोजना के मुताबिक एनएमडीसी में विनिवेश के जरिये 6,000 करोड़ रुपये, एनएचपीसी से 230 करोड़ रुपये और एमओआईएल के जरिये 395 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। नाल्को में 10 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री से 12,000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है।
हिंदुस्तान कॉपर के मामले में भी सरकार 10 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री ही करेगी। सेल में 5 फीसदी विनिवेश की तैयारी है और उसके बाद कंपनी भी इतनी ही हिस्सेदारी के लिए निर्गम लेकर आएगी। बीएचईएल में 5 फीसदी विनिवेश से सरकार की झोली में 3,000 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश के जरिये 30,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है लेकिन अभी तक यह प्रक्रिया सुस्त पड़ी है जिसमें अब तेजी आने की उम्मीद की जा रही है। पिछले वित्त वर्ष में भी सरकार ने विनिवेश के जरिये 40,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया था लेकिन वह पूरा नहीं हो पाया था।
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