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अधर में लटकी यूनिनॉर
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की वजह से यूनिनॉर अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। क्या कंपनी अगस्त के बाद अपना कारोबार जारी रखेगी? तमाम चुनौतियों के बावजूद कंपनी किस तरह लोगों के आत्मविश्वास और कारोबार को बरकरार रखने की कोशिशें कर रही है, बता रही हैं वीनू संधू : /  June 24, 2012

गर्मी के मौसम में तपता हुआ दिन। सीमेंट और कांच से बनी आलीशान इमारत भयानक गर्मी में ऐसा आभास दे रही थी कि मानो अभी ही पिघल जाएगी। शायद यही कारण था कि यूनिनॉर के दफ्तर में लोगों ने एसी उसकी पूरी क्षमता पर चला रखा था। इस खुले दफ्तर में सैकड़ों की संख्या में कुछ महिला पुरुष कर्मचारी एकत्रित हैं। इनमें से ज्यादातर 35 वर्ष की उम्र से कम के ही हैं। यहां केबिन की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही छिप सकने के लिए दीवारें। यह यूनिनॉर के प्रबंध निदेशक सिग्वे ब्रेक की अपने कर्मचारियों के साथ टाउन हाल बैठक का वक्त है। इस बैठक की शुरुआत कुछ चुटकुलों से होती है। सभी लोग बगैर किसी रोकटोक के दिल खोलकर हंस रहे थे। किसी के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। इसके बाद ब्रेक ने माइक संभाल लिया। कंपनी के कर्मचारियों में कई सारे विदेशी चेहरे भी शामिल हैं। ब्रेक ने सबको भारत सरकार के मंत्रियों और नॉर्वे में टेलीनॉर बोर्ड के साथ हुई अपनी बातचीत के बारे में विस्तार से बताया। टेलीनॉर की यूनिनॉर में दो तिहाई हिस्सेदारी है जबकि एक तिहाई हिस्सेदारी यूनिटेक के पास है। करीब 20 मिनट तक बोलने के बाद उन्होंने लोगों को सवाल पूछने का मौका दिया। सिर्फ तीन सवाल ही सामने आए। उसके बाद उन्होंने लोगों से कर्मचारियों से खुद के आत्मविश्वास को दस में अंक देने के लिए कहा। ज्यादातर जवाब पांच से सात के बीच में ही थे। बे्रक ने कहा, 'अच्छा है कि आप शून्य पर नहीं हैं और यह भी अच्छा है कि आप दस पर नहीं हैं।' अपनी बात उन्होंने हल्ला बोल के घोष के साथ खत्म की। बाद में बिज़नेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए उन्होंने अपने आत्मविश्वास को छह अंक दिये। हालांकि इसके पीछे उन्होंने वजह नहीं बताई। यूनिनॉर शायद भारत में सेवा देने वाले टेलीकॉम ऑपरेटरों में सबसे खराब हालत में है। कंपनी के पास करीब 4.5 करोड़ ग्राहक, 17,000 से अधिक कर्मचारी, 2000 से ज्यादा वितरक और करीब 5 लाख रिटेलरों का लंबा चौड़ा तंत्र है। 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के मुताबिक अगस्त तक कंपनी को अपने स्पेक्ट्रम लौटाने होंगे। कंपनी की इस समस्या का एकमात्र समाधान यही है कि दूरसंचार विभाग स्पेक्ट्रमों की नीलामी अगस्त के पहले कर दे। लेकिन विभाग के मुताबिक यह काफी मुश्किल है। लेकिन यूनिनॉर का कहना है कि यह काम पूरा भी हो सकता है क्योंकि पिछले साल ही 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के आधार पर ही 2जी स्पेक्ट्रमों की नीलामी की जा सकती है। इसलिए इन दिनों ब्रेक के जिम्मे बहुत सारा काम है, मसलन सरकार के नुमाइंदों से स्पेक्ट्रम की उचित कीमत पर नीलामी के लिए बात करना, नये निवेशकों से कारोबार को लेकर समझौते करना, हिस्सेदारों को यह बताना कि अभी सबकुछ खत्म नहीं हुआ और तो और अपने लोगों को अपने साथ बनाए रखना।

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ब्रेक कहते हैं कि इस मुश्किल वक्त में भी यूनिनॉर के कर्मचारियों के उत्साह और ऊर्जा से वह काफी खुश हैं। कर्मचारियों का भविष्य दांव पर लगे होने के बावजूद उनके उत्साह में कोई कमी नहीं है। इसे देखते हुए कंपनी ने उन्हें एक महीने की तनख्वाह बोनस के तौर पर द दी। इसके अलावा अप्रैल महीने में कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन में 12-13 फीसदी का सम्मानजनक इजाफा भी किया। वर्ष 2008 में यूनिनॉर की शुरुआत से कंपनी के सेल्स टीम के साथ काम कर रहे एक अधिकारी ने बताया, 'कंपनी के प्रबंधन की ओर हमेशा साफसुथरी बात की गई। यह संकट शुरू होने के बाद सूचनाओं के खुले प्रवाह में इजाफा हुआ है।' ब्रेक ने कर्मचारियों को कभी कोई झूठी आशा नहीं दिखाई। जो जैसा था ब्रेक ने उन्हें वैसे ही बताया। अधिकारी ने बताया कि कंपनी के कर्मचारियों के बीच कोई कोई ऊहापोह की स्थिति नहीं है। हालांकि कुछ लोगों ने कंपनी छोड़ दी और कुछ अच्छे ऑफर के इंतजार में हैं। लेकिन कंपनी के उच्च अधिकारी कंपनी के साथ बने हुए हैं। प्रतिद्वंद्वियों के लिए यह बेहतरीन समय है। यूनिनॉर के कर्मचारियों को दूसरी कंपनियों की ओर से लगातार एसएमएस मिल रहे हैं जिनमें 'पश्चिम उत्तर प्रदेश में सेल्स का काम करने लिए अपने बॉयोडाटा के साथ आएं' लिखा होता है। लेकिन कोई भी ऐसे ऑफरों में रुचि नहीं ले रहा है। काम करने वालों के आत्मविश्वास को कम न होने देना भी कंपनी के काम का एक हिस्सा है। दफ्तर के बाहर भी कर्मचारियों को अपने साथी, माता-पिता और यहां तक कि अपने बच्चों को इस बात की सफाई देनी पड़ रही है कि आखिर वे किसी ऐसी कंपनी के साथ क्यों जुड़े हुए हैं जिसका भारत में कोई भविष्य नजर नहीं आता है। ब्रेक ने भी इस काम को करने का जिम्मा अपने सर ले रखा है। उन्होंने कर्मचारियों के परिवारों को पत्र लिखे और कइयों से मुलाकात भी की। कंपनी के ऑपरेशन विभाग के कर्मचारी ने बताया, 'ऐसी ही एक मीटिंग के दौरान एक महिला ने अपनी चिंताओं के बारे में बताया कि वह सिर्फ इसलिए परेशान नहीं थी कि उसके घर में सिर्फ उसके पति ही कमाने वाले हैं बल्कि चिंता की बात यह थी कि उन्हें हर महीने कर्ज की किस्त भी भरनी होती है।' कई दूरसंचार कंपनियों के साथ काम कर चुके एक कर्मचारी कहते हैं, 'ब्रेक के प्रयासों के चलते कंपनी छोड़ रहे लोगों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने सही बात लोगों के सामने रखी, भले ही वह सुनने में खराब लगे और फिर भी वह सबको अपने साथ लेकर चलना चाहते हैं।' कंपनी को दावों पर बमुश्किल विश्वास करते हुए वह कहते हैं, 'यहां जो कुछ भी हो रहा है वह साधारण तो नहीं है।' कर्मचारी उत्साहित भले ही नजर आते हों लेकिन जेहन में बहुत सारे सवाल कौंधते रहते हैं। सप्ताह में होने वाली बैठकों में न सिर्फ वे अपने सवाल उठाते हैं बल्कि वे अपने सवाल ब्रेक को मेल भी करते हैं। ब्रेक उनके सवालों के जवाब वीडियो साक्षात्कार हार्ड टॉक के जरिए देते हैं। कंपनी के कर्मचारी इस साक्षात्कार को कंपनी के इंट्रानेट की मदद से देख सकते हैं। यहां आजकल दुनिया भर के टेलीनॉर के कर्मचारियों द्वारा अपलोड किये गये 'आई लव यूनिनॉर', 'वी आर विद यू यूनिनॉर' और 'हैंग इन देयर यूनिनॉर' जैसे वीडियो भी देखने को मिल सकते हैं। एक कर्मचारी ने पूछा कि क्या यह सच है कि यूनिनॉर और भारत को लेकर टेलीनॉर की भविष्यवाणियां गलत साबित हुईं? बे्रक ने कहा कि  यह बात बिल्कुल सच है। वह कहते हैं, 'और ऐसा यूनिनॉर पर हाल में आए संकट के चलते हुआ। लेकिन इसके बावजूद टेलीनॉर भारत में कारोबार करना चाहती है और अपने नये हिस्सेदार के साथ 74 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ कारोबार शुरू करेगी।' अगला सवाल था कि क्या टेलीनॉर को नया हिस्सेदार मिल गया है? ब्रेक का जवाब था, 'आप जानते हैं कि हम अपनी पुरानी वर्तमान पत्नी (यूनिटेक) से छुटकारा चाहते हैं। इसके लिए हमें एक नई पत्नी की तलाश है। पांच-छह लोगों से हमारी बातचीत चल रही है और सभी काफी खूबसूरत हैं।' पूरे कमरे में बैठे सभी लोग हंसने लगे। कर्मचारियों को उम्मीद है कि टेलीनॉर के नये अवतार में उनके लिए जगह पक्की है। कंपनी की संपत्ति और ग्राहकों को भी स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ब्रेक ने बाद में हमें बताया कि टेलीनॉर कारोबार जारी रखना चाहती है। कंपनी को एक ऐसे साथी की तलाश है जिसे वित्तीय मामलों में रुचि हो। अपनी इन बातों से ब्रेक यह साफ कर देना चाहते थे कि उनका अगला हिस्सेदार कोई दूसरी टेलीकॉम कंपनी नहीं होगी। क्या वह यूनिटेक की ही तरह कोई दूसरी रियल एस्टेट कंपनी होगी? इस सवाल को ब्रेक मुस्कराकर टाल गए।

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वहीं बाजार में प्रतिद्वंद्वी यूनिनॉर से कारोबार झटकने की कोशिश में हैं। चुनौतियां काफी अलग तरह की हैं। किसी प्रतिद्वंद्वी द्वारा बिहार में जारी किए गए एक पोस्टर में लिखा है, 'सावधान, देश की उच्चतम संस्था उच्चतम न्यायालय ने बिहार और झारखंड सर्किल में एस टेल, यूनिनॉर और एमटीएस के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इसलिए कृपया सावधान रहें।' एक अन्य प्रतिद्वंद्वी द्वारा अपने कर्मचारियों को एसएमएस भेजा गया जिसमें लिखा था, 'सेवा प्रदाता बदलने की सुविधा (एमएनपी) का इस्तेमाल शुरू कर दीजिए। हर आउटलेट पर आज की खबर के बारे में बताइए जिसके मुताबिक अगर ट्राई के प्रस्ताव स्वीकार कर लिए गए तो टेलीनॉर भारत में अपना कारोबार समेट लेगी। उसके कारोबार को अधिग्रहीत करने के लिए ऐसा करना होगा।' ब्रेक अच्छे से जानते हैं कि क्या हो रहा है। वह कहते हैं, 'हर दिन या हर दूसरे दिन हमारे कर्मचारी प्रत्येक यूनिनॉर रिटेलर के पास खुद जा रहे हैं। बड़े रिटेलरों के पास तो दिन में कई बार।' ब्रेक हर सेल्स पार्टनर से भी पत्राचार कर रहे हैं। यूनिनॉर के क्षेत्रीय सेल्स प्रबंधक राजीव कुमार के बेंगलूर स्थित दफ्तर में लगे एक पोस्टर के मुताबिक, 'हमने 14,000 करोड़ रुपये निवेश किए और इस सफर मे हमें करीब 4 करोड़ ग्राहक मिले। इसलिए हम भारत में बने रहने के लिए दृढ़प्रतिज्ञ हैं।' कुमार बताते हैं कि कुछ महीने पहले ये पोस्टर कर्मचारियों को बांटे गए थे। इसे आत्मविश्वास बढ़ाने की एक कोशिश माना जा सकता है। कुमार पिछले तीन सालों से यूनिनॉर के साथ जुड़े हुए हैं। वह कंपनी के सामने पेश आ रही समस्याओं के बारे में अच्छी तरह जानते हैं लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि कंपनी एक बार फिर से लाइसेंसों के लिए बोली लगाएगी। कुमार भरोसा दिलाते हुए कहते हैं कि कंपनी अभी भी भर्ती कर रही है। वह कहते हैं, 'अगर वाकई कंपनी देश से कारोबार समेटने के बारे में सोच रही होती तो उनका पहला कदम होता कर्मचारियों को काम से निकालना।' इतनी सारी समस्याओं के बावजूद ग्राहक आधार बढऩा भी कंपनी के लिए राहत की बात है। कुमार की टीम में दो वितरक हैं। इनमें से हर एक के पास 300-400 आउटलेटों को आपूर्ति की जिम्मेदारी है। कुमार को हर महीने 1,800 नये कनेक्शन बांटने का लक्ष्य दिया जाता है और इस लक्ष्य को वह आसानी से पूरा कर लेते हैं। कुमार कहते हैं, 'ज्यादातर ग्राहक आजकल दो नंबर रखते हैं। एक व्यक्तिगत और दूसरा कारोबार के लिए, जिसमें वे सस्ती काल दर चाहते हैं।
यूनिनॉर उस श्रेणी तक आसानी से पहुंच जाती है।' कुमार भी व्यावसायिक उपयोग के लिए यूनिनॉर के नंबर का प्रयोग करते हैं जबकि व्यक्तिगत उपयोग के लिए एयरटेल का। वह खुद यह मानते हैं कि भविष्य को लेकर उनकी भी कुछ चिंताएं हैं। वह कहते हैं, 'फिलहाल हम अगस्त तक का इंतजार कर रहे हैं। देखते हैं क्या होता है? शायद भगवान को भी नहीं पता कि क्या होने वाला है।' दक्षिणी बेंगलूर में एक मोबाइल दुकान के बाहर सफेद नीली छतरी के नीचे बैठे 18 वर्षीय सैयद में काफी विश्वास नजर आता है। वह कहते हैं कि वह दिन में कम से कम 10-15 सिम बेच ही लेते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या यूनिनॉर के कारोबार बंद करने की खबरों से वह परेशान हैं तो उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि यूनिनॉर को फिर से लाइसेंस मिल जाएगा।' वह कहते हैं कि कंपनी ने उनको कारोबार बंद करने के बारे में कुछ भी नहीं बताया और न ही कोई ग्राहक उनसे इस बारे में कोई पूछताछ करता है। ग्राहक यूनिनॉर की सस्ती योजनाओं के चलते आकर्षित होते हैं। वह कहते हैं, 'लोग एक महीने में चार सिम कार्ड खरीदते हैं क्योंकि यह काफी सस्ता पड़ता है।' उत्तरी कोलकाता के रिटेलर मनोज पांडेय भी यूनिनॉर के कारोबार खत्म होने की खबर से बेफिक्र नजर आते हैं। हालांकि कोलकाता के यूनिनॉर ऑफिस के कर्मचारी अपनी नौकरी छूट जाने के डर से चिंतित हैं। वह बताते हैं कि ब्रेक खुद कोलकाता आए और भरोसा जगाने के लिए सबके साथ मिलकर एक रोड शो किया। सैकड़ों मील दूर चेन्नई में एक मोबाइल दुकान पर काम करने वाले कार्तिक ने बताया कि यूनिनॉर के अधिकारियों ने उन्हें इस समस्या के बारे में बताया था।
वह कहते हैं, 'जनवरी-फरवरी के बाद से बिक्री में काफी कमी आई है। ग्राहक यूनिनॉर के बारे में बताए जाने के बावजूद दूसरी कंपनी के बारे में पूछते हैं। पहले हम करीब हर महीने 100 सिम कार्ड बेच लिया करते थे और अब हम महीने में पांच सिम भी नहीं बेच पाते हैं।' साथ ही वह यह भी कहते हैं कि सेवाओं के स्तर में भी काफी गिरावट आई है। वह कहते हैं, 'इस क्षेत्र का कार्यभार देख रहे अधिकारी को इसकी जरा भी चिंता नहीं है, हमने सुना है कि वह नौकरी तलाश रहे हैं।' हालांकि यूनिनॉर के मार्केटिंग के प्रयास अभी भी जारी हैं। इन्हीं प्रयासों के अंतर्गत कंपनी ने हाल में रिलीज हुई फिल्म शांघाई के निर्माताओं के साथ गठजोड़ कर लिया। मुंबई, बेंगलूर और अहमदाबाद के लोगों के लिए कंपनी ने योजना की घोषणा की जिसके तहत, 'कोई भी यूनिनॉर कनेक्शन लेने पर शांघाई के कलाकारों से मिलने का मौका दिया जा रहा है।' सबसे बड़ा सवाल वहीं का वहीं है। वह यह कि ब्रेक और उनके लोगों का क्या होगा?

(साथ में बेंगलूर से इंदुलेखा अरविंद, चेन्नई से गिरीश बाबू ए एन, कोलकाता से स्वाति गर्ग और हैदराबाद से इतिश्री सामल)

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