| आपके लाभांश में चुभी मंदी की फांस | | दीपक कोरगांवकर / June 24, 2012 | | | | |
भले ही पीएसयू से खर्च पूर्ववर्ती वर्ष की तुलना में मजबूत बना हुआ है, लेकिन मुनाफे में कमी ने ज्यादातर कंपनियों को लाभांश भुगतान के संदर्भ में सुस्त दृष्टिकोण अपनाने के लिए बाध्य किया है। अब तक वित्त वर्ष 2011-12 के लिए लाभांश की घोषणा कर चुकी 975 कंपनियों में से लगभग 592 कंपनियों ने लाभांश में कटौती दर्ज की है। इन 592 कंपनियों में से 226 ने अपनी लाभांश दर घटाई है जबकि 360 कंपनियां पूर्ववर्ती वर्ष की दर पर इसे बनाए रखने में सफल रहीं और 6 अन्य ने लाभांश नहीं दिया।
आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए ज्यादातर कंपनियों को बढ़ती उत्पादन लागत की वजह से मार्जिन और मुनाफे पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। परिणामस्वरूप, अधिकतर कंपनियां अब अधिक नकदी रखने और लाभांश भुगतान में कटौती करना पसंद कर रही हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि इन 592 कंपनियों का कुल मुनाफा 13 फीसदी घटा है जबकि बाकी 383 कंपनियों, जो लाभांश भुगतान में वृद्घि दर्ज कर चुकी हैं, ने वित्त वर्ष 2012 में शुद्घ मुनाफे में औसतन 14 फीसदी की वृद्घि दर्ज की है। एक स्थानीय ब्रोकर फर्म के विश्लेषक ने कहा, 'कई कंपनियां अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने के लिए अपने मुनाफे के एक हिस्से को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही हैं। इस आय का इस्तेमाल कार्यशील पूंजी की बढ़ती जरूरत या आगामी विस्तार की जरूरत पूरी करने में किया जा सकता है।'
रिकॉर्ड
हीरो मोटोकॉर्प, इन्फोसिस और टाटा मोटर्स जैसी कुछ कंपनियों ने लाभांश दर में कटौती की है। उदाहरण के लिए, हीरो मोटोकॉर्प ने वित्त वर्ष 2012 के लिए भुगतान 50 फीसदी तक घटा कर (पूर्ववर्ती दो वित्त वर्षों में लगभग 2000 करोड़ रुपये की तुलना में) 899 करोड़ रुपये कर दिया। हालांकि इसने दो निर्माण इकाइयों और एक आरऐंडडी इकाई के निर्माण पर 2,575 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है।
दूसरी तरफ टेक महिंद्रा, गोदरेज इंडस्ट्रीज और एक्साइड पूर्ववर्ती वर्ष की रफ्तार को बकरार रखने में सफल रही हैं। शेयरधारकों को एचसीसी, ऑर्बिट कॉर्प और अंसल प्रॉपर्टीज जैसी रियल्टी और इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में दबाव का सामना करना पड़ा है जिन्होंने कम मुनाफा वृद्घि की वजह से लाभांश का भुगतान नहीं किया है।
वृद्घि
औसतन लाभांश भुगतान अनुपात यानी मुनाफे के प्रतिशत के रूप में चुकाया जाने वाला लाभांश वित्त वर्ष 2012 में बढ़ कर 26.9 फीसदी हो गया जो वित्त वर्ष 2011 में 24.8 फीसदी था। सरकारी कंपनियों द्वारा मजबूत लाभांश भुगतान की वजह से इसमें इजाफा दर्ज किया गया। वित्त वर्ष 2012 के लिए कुल 975 कंपनियों ने 92,813 करोड़ रुपये का लाभांश दिया है जबकि वित्त वर्ष 2011 के लिए यह आंकड़ा 82,592 करोड़ रुपये था।
बैंकिंग समेत 29 पीएसयू की कुल लाभांश भुगतान में 44 फीसदी की भागीदारी रही और वित्त वर्ष 2012 के लिए उन्होंने 40,509 करोड़ रुपये का लाभांश दिया जो सालाना आधार पर 5,393 करोड़ रुपये तक अधिक है। एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के रणनीतिकार एवं शोध प्रमुख जगन्नाधम थुनुगुंटला कहते हैं, 'कई कंपनियों के मामले में मुनाफे में कमी की वजह से लाभांश भुगतान में कटौती देखने को मिली है। हालांकि पीएसयू के मामले में लाभांश भुगतान मजबूत रहा है, क्योंकि यह सरकार के लिए प्रमुख राजस्व स्रोत में से एक है।'
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