| औने दाम पर आए पौने शेयर | | जितेंद्र कुमार गुप्ता / June 24, 2012 | | | | |
मौजूदा सुस्त और धुंधले परिदृश्य की वजह से कई व्यवसाय अपनी रीप्लेसमेंट वैल्यू (प्रतिस्थापन मूल्य) से नीचे उपलब्ध हैं जिससे निवेशकों को आकर्षक कीमतों पर मूल्यवान परिसंपत्तियां खरीदने का अवसर मिल गया है। रीप्लेसमेंट वैल्यू वह संभावित रकम है जो किसी कंपनी की मौजूदा परिसंपत्तियों की जगह मौजूदा दरों पर खर्च करनी होती है। यदि किसी कंपनी की परिसंपत्तियां 100 करोड़ रुपये की हैं तो इनमें से कई लगभग 50 करोड़ रुपये की काफी कम वैल्यू पर कारोबार कर रही हैं। ब्रोकरेज फर्म इनाम सिक्योरिटीज द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन के अनुसार इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड, मद्रास सीमेंट्स लिमिटेड, टाटा स्टील और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड, जेएसडब्ल्यू एनर्जी लिमिटेड और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड मार्च 2012 तक अपनी परिसंपत्तियों के आधार पर भारी वैल्यू की पेशकश कर रहे थे।
रीप्लेसमेंट लागत मूल्यांकन प्रणाली की महत्ता मौजूदा माहौल में तेजी से बढ़ी है, क्योंकि भूमि की सीमित उपलब्धता है और इसके अधिग्रहण के लिए मानक सख्त हैं। पर्यावरण संबंधी मुद्दों से समस्याओं में और इजाफा हुआ है। इसलिए नई क्षमताओं की स्थापना न सिर्फ समय की बर्बादी है बल्कि यह अधिक खर्चीला भी है। ऐसा माहौल सभी उद्योगों में भारी भरकम प्रवेश कठिनाइयां सुनिश्चित करेगा, जिससे मौजूदा परिचालन परिसंपत्तियां संभावित खरीदारों/निवेशकों के लिए आकर्षक हो जाएंगी। इसलिए यदि ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो बाजार ऐसे अवसरों के लिए अधिक जिम्मेदार हो सकते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में मौजूदा निराशावाद की वजह से कई कंपनियां काफी कम मूल्यांकन पर कारोबार कर रही हैं और समझदारी से शेयरों का चयन अच्छा रिटर्न दिला सकता है। निवेश कंसल्टेंसी वे2वेल्थ ब्रोकर्स के मुख्य परिचालन अधिकारी अंबरीश बालिगा कहते हैं, 'उतार-चढ़ाव वाले समय में लोग अक्सर मूल्यांकन पर अधिक जोर नहीं देते हैं, क्योंकि धारणाएं अहम भूमिका निभाती हैं और यही वजह है कि कंपनियां और कुछ मजबूत व्यवसाय रीप्लेसमेंट कोस्ट से नीचे कारोबार कर रहे हैं। रीप्लेसमेंट कोस्ट पर आधारित शेयरों के चयन के वक्त मोल-तोल करना एक अच्छी रणनीति हो सकती है और इससे निवेशकों को दीर्घावधि नजरिया मिल सकता है।'
हालांकि इस रणनीति से कई जोखिम भी जुड़े हुए हैं, क्योंकि बाजार ऐसी परिसंपत्तियों की वैल्यू का अहसास कर भी सकते हैं और नहीं भी कर सकते हैं। इसलिए शेयरों का चयन महत्त्वपूर्ण है। इस रास्ते पर चलने वाले निवेशकों को जोखिम सहन करने की क्षमता से लैस होना चाहिए।
कहां हैं अवसर?
मौजूदा समय में रीप्लेसमेंट कोस्ट के संबंध में स्टील, सीमेंट, यूटीलिटीज, रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की कंपनियां अधिक वैल्यू से युक्त हैं। उदाहरण के लिए, दक्षिण भारत स्थित इंडिया सीमेंट्स की 1.5 करोड़-50 लाख टन सीमेंट क्षमता की वैल्यू बाजार द्वारा महज 3600 करोड़ रुपये आंकी गई जबकि इसकी रीप्लेसमेंट कोस्ट 6800 करोड़ रुपये बैठती है।
इसी तरह टाटा स्टील के यूरोपीय परिचालन और इसकी 1.3 करोड़ टन की घरेलू इस्पात क्षमता (उड़ीसा में 30 लाख टन का विस्तार शामिल) को रीप्लेसमेंट कोस्ट के आधार पर लगभग 1,21,000 करोड़ रुपये पर आंका गया है जबकि बाजार इन संपत्तियों का आकलन 41,000 करोड़ रुपये पर कर रहा है। कम इस्पात कीमतों, धीमे मांग परिदृश्य (खासकर इसके यूरोपीय व्यवसाय और अधिक कर्ज के लिए) जैसे कारकों की वजह से मूल्यांकन में यह
अंतर है।
हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि रीप्लेसमेंट कॉस्ट से नीचे कारोबार कर रही कंपनियों के लिए नकारात्मक वजहों से सुर्खियों में रहना स्वाभाविक है। विश्लेषकों का कहना है कि आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स लिमिटेड, फीनिक्स मिल्स लिमिटेड और श्री सीमेंट लिमिटेड जैसे शेयर अच्छी वैल्यू की पेशकश कर रहे हैं।
व्यक्तिगत समस्याएं
हालांकि जहां कुछ कंपनियां सूक्ष्म परिदृश्य की वजह से प्रभावित हो सकती हैं वहीं कुछ अन्य कंपनियां अपने व्यक्तिगत मुद्दों की वजह से सुर्खियों में हैं। यूटीलिटी क्षेत्र में, जेएसडब्ल्यू का मूल्यांकन व्यावसायिक बिजली की बिक्री के लिए अधिक सक्रियता की वजह से घटा है जो उसकी परिचालन क्षमता का लगभग 50 फीसदी है। व्यावसायिक दरों में हाल में कमी आई है जिससे मूल्यांकन प्रभावित हुआ है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड अच्छी वैल्यू की पेशकश कर रही है, लेकिन विश्लेषक इसके अल्पावधि परिदृश्य को लेकर चिंतित हैं। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध भी समस्या बना हुआ है जिससे कंपनी का परियोजना निष्पादन प्रभावित हो रहा है। कंपनी के बहीखाते में भारी भरकम कर्ज भी चिंता का विषय है।
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