| बिहार में स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा बढ़ावा | | बीएस संवाददाता / पटना June 24, 2012 | | | | |
बिहार सरकार ने महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए राज्य में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की तादाद में भारी इजाफा करने का फैसला लिया है। इसके तहत राज्य सरकार ने अगले पांच सालों में राज्य में 10 लाख से ज्यादा एसएचजी को स्थापित करने का फैसला लिया है। साथ ही, वह इन्हें सस्ता कर्ज भी मुहैया कराएगी।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है। इस फैसले के तहत राज्य सरकार अपने 'जीविका' कार्यक्रम के तहत इन एसएचजी की स्थापना करेगी। यह कार्यक्रम राज्य सरकार विश्व बैंक के साथ मिलकर चला रही है। इस बारे में मुख्यमंत्री ने बताया, 'दरअसल, राज्य में महिलाओं का सशक्तिकरण काफी जरूरी है। इसके लिए उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करना होगा। इसीलिए हमने राज्य में 10 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूह स्थापित करने का फैसला लिया है। इन समूहों के जरिये महिलाओं की कमाई में इजाफा होगा। साथ ही, उन्हें हम जनसंख्या नियंत्रण जैसे अहम कार्यक्रमों से भी जोड़ेंगे।'
उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, 'अब हम अपनी जीविका योजना को राज्य के हर हिस्से में लेकर जा रहे हैं। इससे राज्य के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत होगी। हमने राज्य में गरीबी मिटाने के उद्देश्य से अगले पांच साल में 10 लाख एसएचजी गठित करने का फैसला लिया है। इसके तहत 1.25 करोड़ परिवारों को गरीबी के दायरे से बाहर निकाला जाएगा। इस हिसाब से हम अपने राज्य की आधी आबादी का तेज विकास कर पाएंगे।' उन्होंने कहा, 'हालांकि, इस दिशा में कर्ज की कम उपलब्धता और ऊंची ब्याज दरें बड़ी रुकावटें हैं।'
मोदी ने कहा, 'इस दिक्कत को दूर करने के लिए हम बैंकों से एसएचजी को ज्यादा कर्ज देने के लिए कह रहे हैं। साथ ही, अब सरकार ने समय पर अपने कर्ज का भुगतान करने वाले एसएचजी को 7 फीसदी की दर से कर्ज देने का फैसला लिया है। बाकी की रकम का भुगतान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत किया जाएगा। इससे इन समूहों को काफी मदद मिलेगी। साथ ही, राज्य के ग्रामीण इलाकों में इनके प्रभाव में भी इजाफा होगा। वहीं, हम बैंकों से भी कर्ज देने की रफ्तार में इजाफा करने के लिए कहेंगे।'
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