| सार्वजनिक बैंकों से डॉलर खरीदने का आदेश | | भाषा / नई दिल्ली June 22, 2012 | | | | |
रुपये में जारी गिरावट के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोलियम आयात के लिए जरूरी डॉलर का आधा हिस्सा सीधे किसी एक सावर्जनिक बैंक से खरीदने का आदेश दिया है। शीर्ष बैंक का मानना है कि इससे रुपये में आ रही गिरावट पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। फिलहाल कंपनियां जरूरत के मुताबिक विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों से डॉलर की खरीदारी करती हैं।
पेट्रोलियम सचिव जी सी चतुर्वेदी ने कहा, 'रिजर्व बैंक का पत्र सरकार को मिल गया है। हम इस दिशा-निर्देश को लागू करने के लिए तेल कंपनियों से बातचीत कर रहे हैं।' तीन बड़ी सरकारी तेल कंपनियों को कच्चे तेल और एलपीजी जैसे दूसरे पेट्रोलियम पदार्थों के आयात के लिए प्रत्येक महीने करीब 8 अरब डॉलर की जरूरत पड़ती है। चतुर्वेदी ने कहा कि रिजर्व बैंक ने सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन की जरूरत का आधा विदेशी मुद्रा किसी एक सावर्जनिक बैंक से खरीदने और शेष प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए सार्वजनिक और निजी बैंकों से खरीदने का आदेश दिया है।
निजी क्षेत्र की रिलायंस इंडस्ट्रीज और एस्सार आयल जैसी कंपनियां अपनी नीतियों के अनुसार डॉलर की खरीदारी करेंगी। दोनों कंपनियां देश में आयात होने वाली कुल कच्चे तेल का करीब 40 फीसदी आयात करती हैं। पूंजी बहिप्र्रवाह जारी रहने और तेल कंपनियों द्वारा डॉलर की मांग बढ़ाए जाने से डालर के मुकाबले रुपया आज एक रुपये और टूटकर रिकार्ड 57.30 के स्तर तक पहुंच गया। चतुर्वेदी ने कहा, 'फिलहाल तेल कंपनियां विभिन्न बैंकों से डॉलर खरीदने के लिए पूछताछ करती हैं जिससे उनके डॉलर की मांग के बारे में अस्पष्टता बनी रहती है। इसके फलस्वरूप रुपये के मुकाबले डॉलर मजबूत होता है।'
उन्होंने एक उदाहरण के जरिए बताया कि यदि किसी कंपनी को किसी दिन 50 लाख डॉलर की जरूरत है तो वह इसके लिए विभिन्न बैंकों से पूछताछ करती हैं। इससे लगता है कि तेल कंपनियों को भारी रकम की जरूरत है। पिछले महीने ही रिजर्व बैंक ने संकेत दिया था कि वह सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों से केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से डॉलर खरीदने के लिए कहेगा।
देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के अध्यक्ष आर एस बुटोला ने बताया कि आईओसी को तेल आयात के लिए प्रत्येक महीने करीब तीन से चार अरब डॉलर की जरूरत पड़ती है। आईओसी अपनी जरूरत का पांचवां हिस्सा भारतीय स्टेट बैंक से और शेष डॉलर 16 बैंकों से बोली मंगाकर खरीदती है।
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