फिल्म समुदाय के सदस्यों ने देश में फिल्म प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ते हुए सेंसर बोर्ड और सिनेमैटोग्राफी कानून, 1952 को फिर से तैयार करने की मांग की।
मुकेश भट्ट, रमेश सिप्पी, श्याम बेनेगल, सुधीर मिश्र और शबाना आजमी जैसे दिग्गज हस्तियों ने यहां सीआईआई मीडिया एवं मनोरंजन सम्मेलन 2012 में संेसर बोर्ड की अध्यक्षा लीला सैमसन के साथ इस विवादित विषय पर चर्चा की।
मुकेश ने कहा कि सिनेमैटोग्राफी कानून 1952 का है लेकिन अब हम लोग अलग दुनिया में रह रहे हैं। कानून में आज के समय के मुताबिक बदलाव करने की जरूरत है। फिल्मनिर्माताओं को भी यह जानने की जरूरत है कि फिल्म रेटिंग तय करने का तरीका क्या है, किस तरह के अंश को ए या यू या यू..ए प्रमाण पत्र के लायक समझा जाता है।
शबाना आजमी ने बोर्ड सदस्य चुनने के लिए अमेरिकी प्रक्रिया अपनाने की मांग की और कहा कि भारत में जिस ब्रिटिश प्रारूप का अनुशरण किया जा रहा है, वह सही ढंग से काम नहीं कर पा रहा है।