| तकनीकी विकास कोष बनाने का प्रस्ताव | | अनिंदिता डे / मुंबई June 21, 2012 | | | | |
केंद्रीय रसायन मंत्रालय ने पेट्रोकेमिकल विभाग के तहत आने वाली प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिटों को फिर से चालू कराने के लिए तकनीकी विकास कोष (टीडीएफ) बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत उन इकाइयों को सीधे सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य है जो पेट्रोलियम, केमिकल ऐंड पेट्रोकेमिकल इन्वेस्टमेंट रीजन (पीसीपीआईआर) की मुख्य योजना के तहत इकाई लगाना चाहती हों। यह प्रस्ताव योजना आयोग के पास भेजा जा चुका है और इससे औद्योगिक इकाइयों को उत्पादन के आधुनिक तौर-तरीके अपनाने व नई तकनीक हासिल करने में मदद मिलेगी। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस कोष के जरिए नए और अतिरिक्त पूंजीगत उपकरणों की खरीद, नवीनतम तकनीक के अधिग्रहण, प्रक्रियागत तकनीक को उन्नत बनाने, पैकेजिंग में सुधार और कर्मचारियों को दक्ष बनाने के लिए प्रशिक्षण पर होने वाले खर्च को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
अधिकारियों ने कहा कि प्लास्टिक उद्योग कम जटिल है, लेकिन ज्यादा श्रम प्रधान है और यह उद्योग कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल कर्मियों के लिए रोजगार के काफी मौके उपलब्ध कराता है। ऐसे में इसमें प्रशिक्षण का खासा महत्त्व है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कपड़ा समेत कई क्षेत्रों के लिए कोष मुहैया कराया है। प्लास्टिक उद्योग भी महत्त्वपूर्ण है, लेकिन यहां धन की समस्या है, लिहाजा उद्योग को आगे बढऩे में मुश्किल हो रही है। उद्योग में ऊंची कीमत वाले विशेषीकृत उत्पाद बनाने का मौका है।
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