| बारिश में कमी से अपर सर्किट पर पहुंचा जिंस वायदा | |
| दिलीप कुमार झा / मुंबई 06 19, 2012 | | | | |
इस साल मॉनसूनी बारिश में कमी के चलते खरीफ की बुआई पर पडऩे वाले संभावित असर से नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव एक्सचेंज पर कृषि जिंस वायदा के कई अनुबंध अपर सर्किट को छू गए। एक ओर जहां मंगलवार को फरवरी व अप्रैल में डिलिवरी वाला कपास अनुबंध 4 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ क्रमश: 1016 व 1020 रुपये प्रति 20 किलोग्राम पर पहुंच गया, वहीं अक्टूबर व नवंबर में डिलिवरी वाला सोयाबीन का अनुबंध भी बढ़कर क्रमश: 3270 व 3182 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। जून में डिलिवरी वाला धनिया वायदा दिन के उच्चतम स्तर को छूते हुए अंतत: 3678 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
बेंचमार्क धान्य में शामिल चना, जीरा और सरसों के नजदीक माह में डिलिवरी वाला अनुबंध क्रमश: 2.21 फीसदी, 2.68 फीसदी और 2.83 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ क्रमश: 4160 रुपये प्रति क्विंटल, 13,400 रुपये प्रति क्विंटल और 3816 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। मॉनसून की बारिश मौजूदा सीजन के पहले व दूसरे हफ्ते में क्रमश: 36 फीसदी व 50 फीसदी कम रही है, लिहाजा इस साल खरीफ की बुआई पर इसका असर पडऩे की संभावना जताई जा रही है।
इस साल मॉनसून में एक हफ्ते की देरी हुई है और अब तक देश का आधा हिस्सा ही मॉनसून के आगोश में पहुंचा है, लिहाजा खरीफ की बुआई को लेकर चिंता है। समय पर मॉनसून का आगमन भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की बहुसंख्यक आबादी की जीविका कृषि पर आश्रित है और सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के चलते यहां की खेती मोटे तौर पर मॉनसून पर आश्रित है। बारिश में देरी से मिट्टी की नमी कम हो जाएगी और इसका असर पैदावार पर पड़ेगा, साथ ही खरीफ फसलों की बुआई में भी देरी होगी।
एसएमसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2013 में डिलिवरी वाला कपास वायदा 965-990 रुपये के दायरे में रहेगा क्योंकि घरेलू बाजार में मिलों की तरफ से पर्याप्त खरीदारी नहीं हो रही है। वास्तविकता यह है कि बुआई में कमी के चलते इसे समर्थन मिल रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 15 जून तक महाराष्ट्र में 1.31.100 हेक्टेयर में कपास की बुआई हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 2,70,200 हेक्टेयर में कपास की बुआई हुई थी। जुलाई में डिलिवरी वाला सोयाबीन वायदा 3510 रुपये के स्तर को छू लेगा। उधर, यस बैंक के एक विश्लेषक ने कहा कि स्टॉकिस्टों की मांग और कम उत्पादन के अनुमान के चलते हल्दी की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है। निजामाबाद मंडी में हल्दी की आवक 3000-4000 बैग पर स्थिर थी, लेकिन सांगली में घटकर 4000-6000 बैग रह गई है। विभिन्न मंडियों में इसकी कीमतें 32-35 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में है। टेनफेड ने हालांकि हल्दी की खरीद 4000 रुपये प्रति क्विंटल पर करने की घोषणा की है, लेकिन अभी तक खरीदारी शुरू नहीं हुई है। उत्पादक सौदा बेचने के लिए तैयार नहीं हैं क्योंकि वे न्यूनतम समर्थन मूल्य 10,000 रुपये प्रति क्विंटल चाहते हैं। इस बीच, जुलाई में डिलिवरी वाला काली मिर्च वायदा सुस्त रहा और यह 40,500 रुपये के स्तर से नीचे रहा क्योंकि प्रसंस्करण की सुविधा से वंचित स्टॉकिस्ट बारिश के चलते इसे बेच रहे हैं।
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