| 'वृद्धि के लिए हम नए सेगमेंटों पर ध्यान दे रहे हैं' | | ऐसे में जब ज्यादातर घरेलू दवा कंपनियां पुराने पेटेंट के संदर्भ में पश्चिम की ओर देख रही हैं, ल्युपिन की नजर अमेरिका में विकास रणनीति बरकरार रखते हुए भारतीय बाजार के बड़े हिस्से पर लगी हुई है। ल्युपिन के सीएफओ रमेश स्वामीनाथन ने एक साक्षात्कार में सुष्मि डे को बताया कि कंपनी नए क्षेत्रों में हाथ आजमाने के लिए भारत में अधिग्रहण लक्ष्यों की तलाश कर रही है। कंपनी ने क्षमता विस्तार पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना बनाई है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश: / June 18, 2012 | | | | |
कीमतों में ऊंची गिरावट और अमेरिकी जेनरिक बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए आप निकट भविष्य में बाजार में किस तरह की संभावना देख रहे हैं?
ज्यादातर सरकारें बजट की कमी के दबाव में फंसी हुई हैं और मेरा मानना है कि वे अधिक किफायती दवाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगी और इसलिए जेनरिक उद्योग में मजबूती आएगी। जेनरिक की पहुंच सभी क्षेत्रों में बढ़ी है। दरअसल, दुनिया में बड़े बाजार अमेरिका, यूरोप और जापान बने रहेंगे, लेकिन कई अन्य बाजार भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन यदि आप वाकई बड़ा यानी मजबूत वैश्विक कंपनी बनना चाहते हैं तो तो आप बड़े बाजार से मुुंह नहीं मोड़ सकते, लेकिन अन्य बाजारों में भी वृद्घि दर निश्चित रूप से बढ़ेगी। इसलिए संतुलन बनाए रखने की कोशिश जरूरी है।
अमेरिकी बाजार की बड़ी हिस्सेदारी हथियाने के लिए ल्युपिन की रणनीति क्या होगी?
मुझे आने वाले वर्षों में जेनरिक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढऩे की संभावना दिख रही है, लेकिन ल्युपिन हमेशा से श्रेष्ठ चिकित्सा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करती रही है। हम कम प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों पर ध्यान दे रहे हैं जहां हमारा मानना है कि हम कीमतों, ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव (ओसी), ऑप्थलमोलोजी और डर्मेटेलॉजी जैसे सेगमेंटों पर बेहतर पकड़ बना सकते हैं। यह सब हमारे बेजोड़ एवं समेकित बिजनेस मॉडल पर आधारित है जिसने हमें हमारे वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में मार्जिन पर बेहतर नियंत्रण की ताकत दी है। हमने अधिक मुनाफे वाले सेगमेंट में प्रवेश करने के लिए दो साल पहले इंदौर में अपनी ओसी इकाई स्थापित की।
क्या आप अमेरिका में नई दवाओं को लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं और वहां से आपकी राजस्व भागीदारी क्या है?
ल्युपिन ने पिछले साल 25 एब्रेविएटेड न्यू ड्रग एप्लीकेशंस (एएनडीए) फाइल किए और यूएसएफडीए के समक्ष हमारे कुल एएनडीए की संख्या बढ़ कर 173 हो गई। हमें अब तक 64 मंजूरियां मिली हैं। हमें 16 मंजूरियां पिछले साल मिलीं और हमने 11 उत्पाद लॉन्च किए। हम इस साल अमेरिका में 15-20 लॉन्च की संभावना तलाश रहे हैं। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो ल्युपिन अमरिकी बाजार मे 20-25 फीसदी की दर से विकास दर्ज करेगी।
क्या आप अन्य भूभागों में भी प्रवेश करने की योजना बना रहे हैं?
हम लातिन अमेरिकी बाजार और यूरोप में कुछ बाजारों में, खासकर ब्राजील, मैक्सिको, तुर्की जैसे उभरते बाजारों में प्रवेश को इच्छुक हैं। उदाहरण के लिए, अनुमानित रूप से 11 अरब डॉलर से अधिक के बाजार आकार के साथ ल्युपिन के लिए मेक्सिको एक आकर्षक एवं उभरता बाजार है।
ल्युपिन की योजनाओं में भारत के बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
भारत ल्युपिन के समग्र व्यवसाय का अहम हिस्सा है और भविष्य के लिए यह कंपनी की विकास रणनीति का महत्त्वूपर्ण अंग है। वित्त वर्ष 2012 के लिए ल्युपिन के भारतीय फॉर्मुलेशन व्यवसाय का कंपनी के कुल राजस्व में 27 फीसदी का योगदान है। वित्त वर्ष 2012 के दौरान भारतीय फॉर्मुलेशन व्यवसाय 23 फीसदी बढ़ कर 1,905.9 करोड़ रुपये रहा जबकि वित्त वर्ष 2011 में यह राजस्व 1550.9 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।
आपने वित्त वर्ष 2013 के दौरान भारत में कितने उत्पाद लॉन्च करने की योजना बनाई है?
कंपनी ने वित्त वर्ष 2012 में भारत में 30 नए उत्पाद लॉन्च किए हैं और अगले वर्ष भी इतनी संख्या में नए उत्पाद लॉन्च किए जाने
को लेकर कोई समस्या नहीं दिख रही है, क्योंकि हम नए सेगमेंटों में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे हैं।
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