| खाते के चयन से पहले कराधान और मौद्रिक जोखिम पर करें विचार | | योगिनी जोगलेकर / June 17, 2012 | | | | |
डॉलर के मुकाबले रुपया जनवरी 2012 के 51-52 रुपये के स्तर से फिसल कर इस महीने 55-56 के दायरे में आ गया। इस गिरावट को नियंत्रित करने के प्रयास में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नॉन रेजिडेंट ऑर्डिनरी (एनआरओ) और नॉन रेजिडेंट एक्सटर्नल (एनआरई) खातों पर ब्याज दरों को दिसंबर 2011 में नियंत्रण-मुक्त कर दिया था।
हाल में केंद्रीय बैंक ने फॉरेन करेंसी नॉन रेजिडेंट (एफसीएनआर) खाते की दरों को भी नियंत्रण-मुक्त किया है। कोटक महिंद्रा बैंक के कार्यकारी उपाध्यक्ष विराट दीवानजी कहते हैं कि दरों को नियंत्रण-मुक्त किए जाने के बाद से एनआरई खातों पर ब्याज दरें 350 से 400 आधार अंक बढ़ी हैं। वह कहते हैं, 'एफसीएनआर खातों पर ब्याज दर में भी इसी तरह की तेजी देखी जा सकती है।' एनआरआई के लिए यह अच्छी खबर है।
लेकिन इन खातों के बीच आपको किस तरह से चयन करना चाहिए। ज्यादातर एनआरआई के लिए इन खातों में अर्जित ब्याज पर कर देयता और मुद्रा जोखिम पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। यहां इस संबंध में कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है।
एनआरई खाता
यह विदेशी और प्रत्यावर्तनीय फंड के लिए है। इसमें विदेशी मुद्रा को रुपये में तब्दील करना होता है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) एक साल के जमा पर 9 फीसदी की पेशकश कर रहा है जो अगस्त 2011 में 2.5 फीसदी थी। आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे अन्य बैंकों ने दरों में 500 से 600 आधार अंक तक की वृद्घि की है। आप इस खाते में जमा कोष के तहत 100 लाख रुपये तक का ऋण ले सकते हैं। संयुक्त खाते सिर्फ एनआरआई ही रख सकते हैं।
इसमें बैलेंस स्वतंत्र रूप से प्रत्यावर्तनीय है। खाताधारक एनआरई खाते का इस्तेमाल मुद्रा के लिए करते हैं। यदि आपको रुपये में वृद्घि का अनुमान है तो बैंक आपसे एनाअरई जमाओं के लिए कहेंगे। मान लीजिए कि एक एनआरआई ने 100 डॉलर या 5000 रुपये का निवेश किया जब रुपया 50 पर था। यदि रुपया चढ़ कर 45 पर पहुंचता है तो उसे परिपक्वता (5000/45) पर 111 डॉलर का अतिरिक्त ब्याज मिलेगा। लेकिन यदि परिपक्वता के समय रुपये में गिरावट आती है तो उसे नुकसान होगा। इस खाते में अर्जित ब्याज भारत में कर-मुक्त है, लेकिन उन देशों में यह कर के दायरे में आ सकता है जहां वैश्विक आय पर कर लागू है। दीवानजी कहते हैं, 'अपने निवास स्थान वाले देश में अधिक ब्याज अर्जित नहीं करने वाले एनआरआई आकर्षक दरों के लिए एनआरई खाते में रकम रख सकते हैं।'
एनआरओ खाता
इस खाते में भारत में अर्जित आय (लाभांश, पेंशन या किराया) रखी जा सकती है। जाने-माने वित्तीय योजनाकार अरविंद राव कहते हैं कि एनआरओ से रुपये में भुगतान में मदद मिलती है और इसलिए खासकर भारत में निर्भरता की स्थिति में खाताधारकों के लिए यह महत्वपूर्ण है। एनआरओ खाता जमा कोष की निकासी की अनुमति नहीं देता है। यह भी एनआरई की तरह रुपये से जुड़ा खाता है और इसलिए इसमें मुद्रा जोखिम बना हुआ है। यह प्रति वित्त वर्ष सिर्फ 10 लाख डॉलर (5.5 करोड़ रुपये) तक प्रत्यावर्तित किए जाने की अनुमति देता है। ज्यादातर बैंक 7 और 9 फीसदी के बीच भुगतान कर रहे हैं। एनआरओ खाते से किया गया कोई भी प्रेषण 30 फीसदी टीडीएस के दायरे में आता है। भारत और अन्य देशों के बीच डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट (डीटीटीए) के मामले में टीडीएस दर इससे कम हो सकती है और यह भारत और अमेरिका के मामले में 15 फीसदी है। एनआरओ जमाएं भी एनआरआई के मूल देश में कर के दायरे में आ सकती हैं। एनआरओ खाते भारतीय निवासी के साथ भी संयुक्त रूप से संचालित किए जा सकते हैं।
एफसीएनआर खाता
यह खाता सिर्फ 1-5 वर्षों की सावधि जमाओं की सुविधा देता है। इसमें यहां धन रखा जा सकता है और मौद्रिक जोखिम के बगैर विदेशी मुद्रा में निकाला जा सकता है। डॉलर एवं यूरो की अधिकता वाली जमाओं पर एफसीएनआर खाता 3 और 4 फीसदी के बीच ब्याज देता है, वैसे यह अवधि पर निर्भर करता है। इसी तरह पौंड आधारित जमाओं पर यह 4-5 फीसदी का ब्याज चुकाता है। एफसीएनआर पर मूलधन और ब्याज पूरी तरह से स्वदेश भेजने योग्य है। इस पर ब्याज भारत में कर मुक्त है, लेकिन लागू कर मानकों के आधार पर निवासी के देश में यह कर के दायरे में आता है।
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