वैश्विक मंदी और कपास के दामों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण कपड़ा उद्योग की हालत खस्ता है। कर्ज के दलदल में फंसे कारोबारियों को उबारने के लिए महाराष्ट्र सरकार ठोस कदम उठाने की योजना तैयार कर चुकी है। सरकार अपनी नई टेक्सटाइल योजना में कपड़ा कारोबारियों को विशेष छूट देगी। सरकार ने कपड़ा उद्योग के विकास के लिए जीरे विंडो योजना तैयार की है।
पिछले कुछ सालों से कपास और धागे की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण कपड़ा उद्योग कर्ज के दलदल में फंसता जा रहा है। वैश्विक मंदी के कारण विदेशी मांग कम होने की वजह से कारोबारी नए उद्योग लगाने से डरने लगे हैं। महाराष्ट्र के कपड़ा मंत्री नसीम खान का कहना है कि कपड़ा उद्योग में दोबारा चमक लाने के लिए सरकार नई कपड़ा नीति ला रही है। सरकार ने राज्य में वस्त्र उद्योग के विकास के लिए जीरो विंडो प्रणाली तैयार की है। इसमें केन्द्र सरकार की टफ योजना के तहत जिन इकाइयों को लाभ मिलेगा उन इकाइयों को राज्य सरकार स्वत: अपनी योजना में शामिल कर लेगी और इकाइयों को शून्य फीसदी के ब्याज का लाभ मिलेगा।
नए कारखाने लगाने अथवा कारोबार के विकास के लिए कपड़ा कारोबारी बैंकों से जो कर्ज लेंगे, उसके ब्याज का 60 फीसदी सब्सिडी केंद्र सरकार अपनी टफ योजना के तहत देगी और शेष ब्याज महाराष्ट्र सरकार भरेगी। यानी कपड़ा कारोबारियों को बिना ब्याज के बैंकों से कर्ज मिलेगा। हिंदुस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स में कपड़ा कारोबारियों को राज्य की नई कपड़ा नीति की जानकारी देते हुए खान ने कहा कि इस योजना के तहत जो कारोबारी विदर्भ, मराठवाड़ा और कोंकण क्षेत्रों में कपड़ा इकाइयां लगाएंगे, उन इकाइयों को सरकार 10 फीसदी की कैपिटल सब्सिडी भी देगी। हिंदुस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष उत्तम जैन ने कहा कि सरकार की नई कपड़ा नीति उद्योग को बढ़ावा देगी, इससे नई इकाइयां स्थापित करने में मदद मिलेगी। कपड़ा बाजार के जानकार राजीव सिंगल कहते हैं कि पिछले एक साल से मंत्री नई कपड़ा नीति की खूबियां गिना रहे हैं लेकिन यह कब से लागू होगी यह स्पष्ट नहीं है।
महाराष्ट्र सरकार की जीरो विंडो योजना केंद्र सरकार की टफ योजना के तहत जुड़ी है अगर सरकार इसको अमल में लाए तो अच्छी बात होगी। मुंबई के कपड़ों कारोबारी दशकों से ऑक्ट्राई हटाने की मांग कर रहे हैं और डेढ़ साल पहले कपड़ा मंत्री ने व्यापारियों से वादा किया था कि 100 दिन के अंदर कपड़ा से ऑक्ट्राई हटा दी जाएगी लेकिन आज तक मंत्रालय इस पर एक भी ठोस कदम नहीं उठाया है।
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