Advertisement
मई में EV बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड, 45% उछाल से पहली बार 11% के पार पहुंची बाजार हिस्सेदारीTCS चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का बड़ा बयान: 3 साल में कर्मचारियों के बराबर होंगे AI एजेंटवाहन निर्माताओं का नीति आयोग को जवाब- पुराने वाहन कहां हैं, पता नहींEditorial: हादसों के पीछे छिपे भ्रष्टाचार और लापरवाह शहरी शासन की कहानीशास्त्री भवन को अलविदा: सत्ता के गलियारों की अनगिनत गाथाएं समेटे, खुले और जनसुलभ शासन की पहचानक्या तेल संकट के दौर में भारत की महंगाई नियंत्रण नीति जरूरत से ज्यादा सख्त है?रुपये की जोरदार वापसी, कच्चे तेल में गिरावट और RBI के कदमों से मिला सहाराखुदरा निवेशकों का उत्साह पड़ा फीका, लगातार तीसरे महीने धीमी रही नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तारAI जुनून का चरम है स्पेसएक्स का आईपीओ, जेफरीज के क्रिस्टोफर वुड ने जताई बड़ी आशंकापैसिव फंड्स पर सेबी की सख्ती! ETF और इंडेक्स फंड्स के लिए भी आ सकता है 50% ओवरलैप नियम
अन्य समाचार हिमाचल में बागियों के सहारे तृणमूल कांग्र्रेस
'

हिमाचल में बागियों के सहारे तृणमूल कांग्र्रेस

PTI

- October,30 2012 10:23 AM IST

पश्चिम बंगाल में वामदलों को उखाड़ फेंकने और मणिपुर, अरूणाचलप्रदेश, असम एवं उत्तरप्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में भाजपा एवं कांग्रेस के बागियों को टिकट देकर इन दो प्रमुख दलों की समस्याएं बढ़ा दी है।

राज्यसभा सदस्य और तृणमूल के प्रदेश प्रभारी के डी सिंह ने भाषा से कहा कि राज्य में चुनाव लड़ने का मकसद भ्रष्टाचार और महंगाई के विषय को उठाना और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करना है।

उन्होंने कहा, विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेकर तृणमूल आम आदमी के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करना चाहती है जो कांग्रेस नीत संप्रग सरकार की नीतियों से गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैंं।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 25 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किये है जो भाजपा और कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन गया है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस अधिकांश टिकट इन दोनों दलों के बागियों को दिये हैं।

बहरहाल, सिंह ने कहा कि पार्टी ने मजबूत उम्मीदवारों को टिकट दिया है।

राज्य में भाजपा और कांग्रेस दोनों को टिकट बंटवारे में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी और जिन प्रमुख नेताओं को टिकट नहीं मिला उन्हें तृणमूल कांग्रेस ने न केवल शरण दी बल्कि टिकट भी दिया।

राज्य के कई क्षेत्रों में वामदलों के बढ़ते प्रभाव और शिमला नगर निकाय चुनाव में शानदार प्रदर्शन और मेयर पद पर माकपा के कब्जा करने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने इस पर्वतीय राज्य पर जोर लगाया है।

राजनीतिक विश्लेषक तृणमूल की इस कवायद को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त करने का प्रयास बता रहे हैं।

जारी भाषा दीपक

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement