पश्चिम बंगाल में वामदलों को उखाड़ फेंकने और मणिपुर, अरूणाचलप्रदेश, असम एवं उत्तरप्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में भाजपा एवं कांग्रेस के बागियों को टिकट देकर इन दो प्रमुख दलों की समस्याएं बढ़ा दी है।
राज्यसभा सदस्य और तृणमूल के प्रदेश प्रभारी के डी सिंह ने भाषा से कहा कि राज्य में चुनाव लड़ने का मकसद भ्रष्टाचार और महंगाई के विषय को उठाना और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करना है।
उन्होंने कहा, विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेकर तृणमूल आम आदमी के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करना चाहती है जो कांग्रेस नीत संप्रग सरकार की नीतियों से गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैंं।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 25 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किये है जो भाजपा और कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन गया है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस अधिकांश टिकट इन दोनों दलों के बागियों को दिये हैं।
बहरहाल, सिंह ने कहा कि पार्टी ने मजबूत उम्मीदवारों को टिकट दिया है।
राज्य में भाजपा और कांग्रेस दोनों को टिकट बंटवारे में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी और जिन प्रमुख नेताओं को टिकट नहीं मिला उन्हें तृणमूल कांग्रेस ने न केवल शरण दी बल्कि टिकट भी दिया।
राज्य के कई क्षेत्रों में वामदलों के बढ़ते प्रभाव और शिमला नगर निकाय चुनाव में शानदार प्रदर्शन और मेयर पद पर माकपा के कब्जा करने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने इस पर्वतीय राज्य पर जोर लगाया है।
राजनीतिक विश्लेषक तृणमूल की इस कवायद को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त करने का प्रयास बता रहे हैं।
जारी भाषा दीपक