10 वां कल्पनीरझार अंतरराष्ट्रीय लघु कथा फिल्मोत्सव गुरूवार से यहां शुरू होने वाला है । यह फिल्मोत्सव पांच दिन चलेगा और इसमें 15 देशों की करीब 126 फिल्में दिखायी जाएंगी।
दक्षिण एशिया में यह अपनी तरह का अनूठा वार्षिक फिल्म समारोह है। बेहतरीन लघु
कथा फिल्मों वाले इस फिल्म समारोह में दुनिया भर के निर्माता भाग लेते हैं। समारोह में जर्मनी की विशेष भागीदारी होती है।
इस समारोह में मगेश कोल्लेरी की ग्रामोफोन सजिन बाबू की म्यूजिक आफ द ब्रूम अदिति चित्रे की जर्नी टु नागालैंड सुमंत रायचौधरी की डॉटर आफ सागरिका और कुणाल वाल्वे की फोटू जैसी कुछ भारतीय फिल्में भी दिखायी जाएंगी।
इसके अलावा इस अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में हांगकांग के वांग वाई किट की फिल्म द डिसाइसिव मोमेंट स्पेन की निर्देशक हारित्ज जुबीलांगा की शीज लॉस्ट कंट्रोल अफगानी फिल्म यू डोंट बिलांग टु दिस कंट्री और जर्मनी की इन द निक आफ टाइम भी प्रदर्शित की जाएंगी।
कल्पनीरझार फाउंडेशन के संयोजक एस वी रमन ने कहा, इस समारोह की सबसे छोटी फिल्म 1.36 मिनट की है, जबकि सबसे लंबी फिल्म 30 मिनट की है।
इन फिल्मों का प्रदर्शन मैक्स मूलर भवन के ऑडीटोरियम में किया जाएगा।
रमन ने बताया कि जूरी के सदस्य कुल 39 भारतीय नामित फिल्मों में से एक बेहतरीन भारतीय लघुकथा फिल्म का चयन करेंगे। चयनित फिल्म को पत्तन पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इस फिल्म को पुरस्कार स्वरूप 20,000 रुपये दिये जाएंगे।
नई प्रतिभाओं को मौका प्रदान करने के लक्ष्य से जेनरेशन नेक्स्ट सेक्शन श्रेणी के तहत 50 से अधिक छात्रों की फिल्में भी दिखायी जाएंगी।
इस श्रेणी में जर्मनी का हमबर्ग मीडिया स्कूल, भारतीय फिल्म एवं टीवी संस्थान, पुणे, सत्यजीत राय फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, कोलकाता, स्काटलैंड की स्क्रीन एकेडमी की फिल्में दिखायी जाएंगी।
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नननन