| ओएनजीसी: उत्पादन बढ़ाने की चुनौती | | उज्ज्वल जौहरी / June 10, 2012 | | | | |
वित्तीय नतीजों की घोषणा के बाद प्रमुख शेयर बाजारों की तुलना में कुछ मजबूती दर्ज करने में सफल रहे ओएनजीसी के शेयर को इस तेजी को बरकरार रखने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। ओएनजीसी ने मार्च 2012 की तिमाही में उम्मीद की तुलना में शानदार वित्तीय नतीजों की घोषणा कर बाजार को आश्चर्यचकित कर दिया। अनुमान की तुलना में सब्सिडी में कमी से कंपनी की शुद्घ प्राप्तियों में सुधार दर्ज किया गया और इससे मुनाफे को मजबूती मिली। हालांकि ओएनजीसी के तेल कुओं से घरेलू तेल उत्पादन घटने से चिंताएं बढ़ी हैं। अच्छे भंडारण अनुपात के बावजूद वित्त वर्ष 2013 में उत्पादन में और गिरावट आने की आशंका है। सीरिया और सूडान में भू-राजनीतिक समस्याओं के बरकरार रहने से कंपनी की अंतरराष्ट्रीय सहायक कंपनी ओएनजीसी विदेश (ओवीएल) से भी तेल उत्पादन पर दबाव पड़ा है।
इन चिंताओं को देखते हुए विश्लेषकों को वित्त वर्ष 2013 और 2014 के लिए कंपनी के आय अनुमानों में कटौती करने को बाध्य होना पड़ा है। उदाहरण के लिए, ब्रिक्स सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2013 और वित्त वर्ष 2014 के आय अनुमानों में क्रमश: 14 फीसदी और 21 फीसदी तक की कटौती की है।
दूसरी तरफ मजबूत रिजर्व वृद्घि के अलावा मूल्यांकन भी ओएनजीसी के अनुकूल है। 254 रुपये पर यह शेयर लगभग 8 गुना के पीई पर कारोबार कर रहा है जो 7-12 के उसके ऐतिहासिक दायरे के निचले स्तर पर है। इन वजहों से गिरावट की स्थिति में इस शेयर को समर्थन मिलना चाहिए।
उत्पादन में कमी
तीन महीनों और मार्च 2012 में समाप्त पूरे वित्त वर्ष के दौरान घरेलू क्षेत्रों से कच्चे तेल उत्पादन में कमी दर्ज की गई। कच्चा तेल उत्पादन दिसंबर 2011 की तिमाही में 59.6 करोड़ टन से घट कर मार्च 2012 की तिमाही में 57.8 करोड़ टन रह गया जबकि केयर्न इंडिया से मजबूत उत्पादन की वजह से इसके संयुक्त उद्यमों पर उत्पादन में थोड़ा सुधार दर्ज किया गया है। वित्त वर्ष 2012 के लिए भी ओएनजीसी के घरेलू क्षेत्रों से कच्चा तेल उत्पादन 2.69 करोड़ टन दर्ज किया गया जो वित्त वर्ष 2011 की तुलना में 1.3 फीसदी कम है। ओएनजीसी ने वित्त वर्ष 2013 के लिए 2.754 करोड़ टन घरेलू तेल उत्पादन का लक्ष्य रखा है जबकि ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी इस लक्ष्य को हासिल करने में विफल रहेगी। एशियन मार्केट सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने इसके लिए पूरी तरह से विकसित तेल क्षेत्रों से घटते उत्पादन को जिम्मेदार ठहराया है।
पूरी तरह से विकसित क्षेत्रों से उत्पादन में गिरावट को देखते हुए ब्रिक्स के विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2013 और 2014 के लिए ओएनजीसी के निर्धारित ब्लॉकों से फिर से उत्पादन अनुमान को 8 फीसदी और 10 फीसदी तक घटा कर क्रमश: 2.4 करोड़ टन और 2.45 करोड़ टन कर दिया है। सूडान और सीरिया में भू-राजनीतिक समस्याओं को देखते हुए उन्होंने वित्त वर्ष 2013 और 2014 के लिए ओवीएल उत्पादन अनुमानों को भी घटा कर 60 लाख टन कर दिया है जो दोनों वित्त वर्षों के लिए 20 फीसदी और 30 फीसदी की कटौती है। ओएनजीसी के प्रबंधन ने भी हाल में संपन्न विश्लेषकों के एक सम्मेलन में ओवीएल के उत्पादन को लेकर और सूडान में उत्पादन प्रभावित होने की चिंता जताई थी।
सब्सिडी
अपस्ट्रीम कंपनियों (तेल एवं गैस उत्पादकों) के लिए सब्सिडी विभाजन वित्त वर्ष 2012 के लिए 39.7 फीसदी (55,000 करोड़ रुपये) पर था। इसमें ओएनजीसी की भागीदारी 44,465.6 करोड़ रुपये की है जो विश्लेषकों के अनुमान की तुलना में कम है। इससे कंपनी की कच्चे तेल की कुल प्राप्तियों में इजाफा हुआ है। हालांकि वित्त वर्ष 2013 में, रुपये में गिरावट को देखते हुए कुल सब्सिडी में इजाफा होने की संभावना है। मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों का मानना है कि कुल सब्सिडी 1,62,000 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2012 में सब्सिडी लगभग 1,38,500 करोड़ रुपये थी) के स्तर को छू लेगी। फिर भी कुल सब्सिडी भार में ओएनजीसी की भागीदारी वित्त वर्ष 2012 की तरह ही बनी हुई है। मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों ने शुद्घ प्राप्तियां 60 से घट कर 58 डॉलर प्रति बैरल रह जाने का अनुमान जताया है।
गैस उत्पादन
हालांकि ओएनजीसी को मजबूत गैस उत्पादन से कुछ राहत मिली है जो मार्च 2012 की तिमाही में सालाना आधार पर 4 फीसदी बढ़ कर 6.03 अरब घन मीटर रहा। वित्त वर्ष 2012 में प्राकृतिक गैस उत्पादन 25.5 अरब घन मीटर रहा। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज में मयूर मतानी का मानना है कि घरेलू क्षेत्रों से गैस उत्पादन वित्त वर्ष 2014 तक 28.4 अरब घन मीटर पर पहुंच जाएगा।
नजरिया
धीमे घरेलू तेल उत्पादन की वजह से आय अनुमानों में संशोधन, ओवीएल से उत्पादन में कमी और अधिक सब्सिडी की वजह से शुद्घ प्राप्तियों में गिरावट को देखते हुए विश्लेषकों ने अपने एक वर्षीय कीमत लक्ष्य को भी घटा दिया है जो मौजूदा समय में 280-300 रुपये के दायरे में है। हालांकि विश्लेषकों का यह भी कहना है कि सरकार द्वारा ईंधन तेल कीमतों में वृद्घि के संबंध में कोई भी निर्णय मददगार साबित हो सकता है।
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