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गिरते बाजार में बनाएं डेट पोर्टफोलियो
सुरेश सदगोपन /  May 27, 2012

पिछले तीन वर्षों से महंगाई समस्या बनी हुई है। दिनोदिन बिगड़ते आर्थिक हालात और यूरोप के ऋण संकट की वजह से इस अवधि में शेयर बाजार नीचे चले गए हैं। निवेशक शेयरों से प्रतिफल की प्रतीक्षा करते-करते थक गए हैं। कुछ लोग ऋण बाजार पर अब पहले से अधिक भरोसा करने लगे हैं तो कुछ लोगों का मानना है कि शेयरों में निवेश के बजाय बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट में रकम डालने से उन्हें बेहतर लाभ मिल सकता है। शेयर लंबी अवधि के निवेश साधन होते हैं और उसी हिसाब से प्रतिफल देते हैं। हालांकि पिछले 3-5 साल में लंबी अवधि की परिभाषा में भी बदलाव हुआ है और इस अवधि के दौरान शेयरों ने नकारात्मक  प्रतिफल दिए हैं। हमें फिलहाल यह नहीं मालूम कि बाजार में तेजी आने का सिलसिला कब शुरू होगा। ऐसे में वे लोग जो जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित दांव खेलना चाहते हैं वे डेट पोर्टफोलियो में निवेश कर सकते हैं क्योंकि इससे बुरे दौर से पार पाने में मदद मिलती है।
निश्चित आय योजनाओं से मिल रहे प्रतिफल की दरें ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं और एक टिकाऊ फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो बनाने के लिए कुछ ही बेहतर विकल्प नजर आ रहे हैं। ये योजनाएं कर बचत में मदद करती हैं।
मिसाल के तौर पर फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान पिछले 1-3 साल से 9-9.5 फीसदी प्रतिफल दे रहे हैं। एक साल से अधिक के लिए पूंजीगत कर लाभ बिना इन्डेक्सेशन के 10 फीसदी और इन्डेक्सेशन के साथ 20 फीसदी है। इस वजह से शुद्ध प्रतिफल 8.8-9.2 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया जाता है। यह बुरा नहीं है। एफएमपी उन पत्रों में निवेश करते हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि ब्याज चक्र में बदलाव के बावजूद प्रतिफल अंडरलाइंग इंस्ट्रूमेंट की कूपन दर से अलग नहीं हो। ऊंचे कर दायरे में आने वाले लोगों को एफएमपी की सलाह दी जाती है।
निवेश का दूसरा विकल्प डेट म्युुचुअल फंड हो सकते हैं। ये अंडरलाइंग इंस्ट्रूमेंट की कूपन दरों की पेशकश करते हैं जिससे पूंजी लाभ पाने में मदद मिलती है। ब्याज दरें नीचे जाने पर अंडरलाइंग इंस्ट्रूमेंट की कूपन दर मौजूदा दरों से अधिक होती है और जो मूल्यांकन बढ़ाता है। लिहाजा गिरते बाजार में डेट फंड दहाई अंकों में प्रतिफल देते हैं। जो फंड लंबी अवधि के लिए रकम रखते हैं उनमें पंूजी लाभ देने की क्षमता अधिक होती है।
डेट फंडों में से कुछ गतिशील होते हैं जहां अवधि और साधन का निर्धारण फंड प्रबंधक करते हैं। कुछ फंड प्रबंधक बाजार की स्थिति को देखते हुए पोर्टफोलियो में बदलाव करते हैं तो कुछ 'बाई' और 'होल्ड' रणनीति अपनाते हैं। जो फंड गिल्ट में रकम डालते हैं उनके साथ अनिश्चितता हो सकती है लेकिन गिरते बाजार में वे अच्छा प्रतिफल देते हैं। जो एक साल के लिए निवेश करना चाहते हैं वे उन फंडों पर विचार कर सकते हैं जो अति लघु अवधि या लघु अवधि के पत्रों में निवेश करते हैं। अवधि के आधार पर ये कॉर्पोरेट बॉन्ड, एक साल तक के सर्टिफिकेट्स ऑफ डिपॉजिट्स (सीडी) और छोटी अवधि के व्यावसायिक पत्रों में निवेश करते हैं। एक साल से कम अवधि में भी ये फंड बेहतर प्राप्तियां दे सकते हैं। बाजार के अच्छा नहीं करने की स्थिति में ये फंड सतत प्रतिफल देते हैं।
एक साल से कम अवधि वाले फंड अति लघु अवधि के माने जाते हैं। ये फंड काफी कम अवधि के साधनों में निवेश करते हैं। चूंकि, 3 महीने वाले सीडी 9.85- और 3 महीने वाले सीपी 10.15 फीसदी का प्रतिफल दे रहे हैं, इसलिए अति लघु अवधि के फंड आकर्षक प्रतिफल की पेशकश करने में सफल होंगे। अगर आपके पास एक साल  से कम समय है तो लाभांश विकल्प पर ध्यान केंद्रित करें जहां लाभांश वितरण कर का भुगतान फंड कंपनी करती है। निवेशक को कर का भुगतान ग्रोथ ऑप्शन में कर दायरे के अनुसार होता है।
पिछले साल आने वाले कर मुक्त बॉन्ड जिनकी अवधि 10-15 साल की है वे 8.2-8.3 फीसदी का प्रतिफल दे रहे हैं। लंबी अवधि में ये आकर्षक होते हैं। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) की तुलना में ये बेहतर होते हैं क्योंकि प्रतिफल सुनिश्चित होता है। पीपीएफ से प्राप्त होने वाला प्रतिफल बाजार से जुड़ा होता है और ये हरेक साल बदल सकता है। जिन लोगों ने इन बॉन्ड में अब तक निवेश नहीं किया है वे स्टॉक एक्सचेंज से 8 फीसदी की प्राप्ति पर इन्हें खरीद सकते हैं।
भारतीय निवेशकों  के बीच बैंक जमा और पीपीएफ खासे लोकप्रिय हैं। कम जोखिम के कारण फिक्स्ड डिपॉजिट को लोग पसंद करते हैं। इन दिनों 1-3 साल वाले डिपॉजिट 8-9 फीसदी (कर पूर्व) प्रतिफल दे रहे हैं। इसके अलावा कंपनी डिपॉजिट भी हैं जो 1-2 फीसदी अधिक प्रतिफल दे सकते हैं। लेकिन इनके साथ जोखिम कुछ अधिक जुड़ा रहता है और निवेशकों को इनकी रेटिंग के हिसाब से निवेश करने की सलाह दी जाती है। पीपीएफ लंबी अवधि (15 साल) के निवेश साधन होते हैं और तरलता उतनी अधिक नहीं होती है। किसी वित्त वर्ष में आप 1 लाख रुपये तक निवेश कर सकते हैं। अपनी आवश्यकतानुसार इन साधनों का इस्तेमाल कर आप अपने निवेश पोर्टफोलियो की संरचना कर सकते हैं।

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