| गार पर हटी सरकार, सख्त कदम पड़े नरम | | बीएस संवाददाता / नई दिल्ली May 07, 2012 | | | | |
आम बजट पेश करते समय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भले ही सख्ती दिखाई हो लेकिन आज संसद में वित्त विधेयक 2012 पर उनके बयान में वह सख्ती नजर नहीं आई और कुछ कठोर बजट प्रस्तावों को उन्होंने वापस ले लिया। मुखर्जी ने निवेशकों को जहां राहत देने की बात कही वहीं आभूषण निर्माताओं को भी मायूस नहीं किया। वित्त मंत्री ने बजट में प्रस्तावित जनरल एंटी अवॉयडेंस रूल (गार) प्रावधानों को एक साल के लिए टाल दिया जबकि आभूषणों पर प्रस्तावित 1 फीसदी उत्पाद शुल्क को भी वापस ले लिया। साथ ही निजी इक्विटी निवेशकों के लिए दीर्घावधि पूंजी प्राप्ति कर 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया और उत्पाद एवंं सीमा शुल्क उल्लंघन पर गैर-जमानती प्रावधानों को भी वापस लेने की घोषणा की।
वित्त विधेयक 2012 पर लोक सभा में चर्चा के दौरान मुखर्जी ने कहा, 'करदाताओं और कर प्रशासन को सभी मुद्दों के समाधान के लिए अधिक समय देने के उद्देश्य से मैं गार प्रावधानों का कार्यान्वयन एक साल के लिए स्थगित करता हूं। अब यह 2013-14 और उसके बाद के वर्षों में लागू होगा।' गार प्रावधानों के टलने से उन विदेशी निवेशकों को काफी राहत मिली है जिन्होंने कर बचाने वाले देशों के जरिये पिछले साल सूचीबद्घ भारतीय कंपनियों में निवेश किया था। सभी वर्ग के निवेशकों को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने कर उल्लंघन मामले का दायित्व कर अधिकारियों पर डाला है जबकि बजट प्रस्ताव में इसे करदाताओं पर डाला गया था।
सरकार ने संसद की स्थायी समिति की उस मांग को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कहा गया था कि गार को मंजूरी देने के लिए गठित समिति में एक स्वतंत्र सदस्य को शामिल किया जाए। सरकार ने समिति में विधि मंत्रालय में संयुक्त सचिव या इससे उच्च पद वाले अधिकारी को स्वतंत्र सदस्य के तौर पर शामिल करने की बात कही है। वित्त मंत्री ने बताया कि गार से जुडे मुद्दों में अधिक स्पष्टता लाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जिसने विदेशी संस्थागत निवेशकों सहित सभी संबद्ध पक्षों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं।
भारत की परिसंपत्तियों के विदेश में अप्रत्यक्ष तौर पर हस्तांतरण मामले में पूंजी लाभ कर पर पिछली तिथि से संशोधन लागू करने के प्रावधानों पर सभी आशंका को दूर करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इस तरह का संशोधन दोहरे कराधान निषेध करार (डीटीएए) प्रावधान का उल्लंघन नहीं करेगा। भारत का 82 देशों के साथ डीटीएए करार है। वित्त मंत्री ने कहा कि वैसे कर मामले जिनका कर निर्धारण पहले किया जा चुका है, उन्हें दोबारा नहीं खोला जा सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि वोडाफोन और इस तरह के अन्य सौदों से सरकार को 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये राजस्व की उम्मीद बरकरार है।
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, 'वोडाफोन जैसे कई सौदे कर बचाने वाले देशों के जरिये हुए हैं, जिनके साथ भारत का डीटीएए नहीं है और ऐसे सौदों पर सरकार को कर लगाने का अधिकार है।' अप्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर वित्त मंत्री ने दो विवादस्पद प्रस्तावों- आभूषण पर 1 फीसदी उत्पाद शुल्क और उत्पाद व सीमा शुल्क उल्लंघन पर गैर-जमानती प्रावधानों को भी वापस ले लिया है। राज्यों को राहत देते हुए नकारात्मक सूची में शामिल 'सेवाओं' की परिभाषा भी बदलने की बात कही गई है। मुखर्जी ने कहा कि अप्रत्यक्ष कर मामले में अन्य चिंता को अधिसूचना जारी करते समय दूर किया जाएगा।
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