भगवान राम सदियों से भारतीयों की श्रद्धा का आधार रहे हैं। भारत के साहित्य, कला, चित्र और लोकजीवन में राम का चरित्र इतना अधिक मर्यादित है कि लोगों ने उन्हें भगवान माना है। लेकिन बदलते हुए समय के अनुसार आज की पीढ़ी के लिए ये आधार कमजोर और पुराने पड़ने लगे हैं।
आप भी बन सकते हैं रामके लेखक डा. विजय अग्रवाल अपनी नई पुस्तक में राम के चरित्र को बिल्कुल ही नए और आधुनिक संदर्भों में देखते हैं। अग्रवाल इस मान्यता को लेकर चले हैं कि राम भी एक राजपुत्र ही थे। लेकिन उन्होंने अपने जीवन में जो निर्णय लिए, संघर्ष का जो रास्ता चुना, अपनी चेतना को जो लगातार शुद्ध करते गए तथा अपने बात-व्यवहार के लिए जो नीति अपनाई, उसने उन्हें भगवान बना दिया।
इस पुस्तक ने राम के चरित्र को बिल्कुल नए अंदाज में पाठकों के सामने पेश किया है। जनकपुर की वाटिका में सीता को देखकर राम के मन में उठी प्रेम की भावना, धनुष यग्य में राम द्वारा प्रेम की शक्ति का प्रयोग किया जाना, भगवान परशुराम के क्रोध को शांत करने की कला, सीता के स्वर्णमृग का आधुनिक प्रसंग, बालि के वध तथा शूर्पणखा के नाक के काटे जाने का औचित्य सहित कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनका विश्लेषण एकदम नया है, चमत्कारिक और रोमांचकारी भी। राम के चरित्र के इतने नए आयाम आपको इसमें पहली बार देखने को मिलेंगे।