| वित्तीय सुधार हेतु ठोस कदम की उम्मीद कम | | नम्रता आचार्य / कोलकाता March 21, 2012 | | | | |
अगर रेल बजट से कोई संकेत लिया जाए तो इस बात की उम्मीद कम ही है कि पश्चिम बंगाल सरकार वित्त वर्ष 2012-13 के बजट में राज्य की वित्तीय स्थिति को पटरी पर लाने के लिए साहसिक और ठोस उपायों की घोषणा करेगी। खस्ता माली हालत के बीच राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्रा 23 मार्च को राज्य विधानसभा में बजट पेश करेंगे। लेकिन इसमें किसी साहसिक कदम की घोषणा होने की उम्मीद कम है। सूत्रों का कहना है कि इसके उलट ममता सरकार अपनी लोकप्रिय छवि बरकरार रखने के लिए खराब वित्तीय हालत के बावजूद अलग से रकम का प्रावधान कर सकती है। जानकारों का कहना है कि बिना खपत को बढ़ावा दिए बड़ी मात्रा में राजस्व वसूलने का तरीका कर में बढ़ोतरी और कुछ नए उपाय जैसे चुंगी और कृषि जिंसों पर खरीद कर लागू करने का हो सकता है।
जानकारों का कहना है कि केवल चुंगी से सरकार को सालाना 300 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति हो सकती है लेकिन सरकार ऐसा शायद ही करेगी क्योंकि इससे खर्च आधारित महंगाई बढ़ सकती है। इतना ही नहीं, यह सरकार की घोषित नीति 'मां माटी मानुष' के खिलाफ जाएगी।
व्यापार को बढ़ावा देने के लिए 90 के दशक के शुरू में चुंगी समाप्त कर दिया गया था लेकिन इसके अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। पश्चिम बंगाल में कई वस्तुएं हैं जिन पर मूल्य वर्धित कर(वैट) काफी कम यानी शून्य से चार फीसदी के बीच लगता है। मिसाल के तौर पर जब तंबाकू और पान मसाले की बिक्री पैकट में होती है तो इस पर 20 फीसदी वैट लगता है लेकिन बीड़ी इस कर से मुक्त है। राज्य चार श्रेणियों शून्य, 1, 4, 13.50 और 20 फीसदी में वैट वसूलती है। हाल में की केरल सरकार ने अपने सालाना बजट में वैट श्रेणी को 4-12.5 से बढ़ाकर 5-13.5 कर 1,512.05 करोड़ अतिरिक्त राजस्व जुटाने की योजना की घोषणा की है।
पश्चिम बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स की अप्रत्यक्ष कर समिति के चेयरमैन बरण चटर्जी कहते हैं, 'जब तक खपत का स्तर नहीं बढ़ता तब तक लंबी अवधि में राज्य की वित्तीय हालत में सुधार की उम्मीद नहीं है।'
इस समय पश्चिम बंगाल में वैट राजस्व जुटाने का सबसे बड़ा जरिया है। हाल में ही राज्य सरकार ने करों में बढ़ोतरी के कई पहल की थी लेकिन जनवरी तक व्यावसायिक करों में 20 फीसदी की तेजी दिखी जो मौजूदा वित्त वर्ष के लिए निर्धारित 30 फीसदी के लक्ष्य से काफी कम है। सरकार पेशेवर कर श्रेणी में छोटे सेवा प्रदाताओं पर कर लगाने से परहेज करती रही है। लोकप्रियता हासिल करने के लिए सत्ता संभालने के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने 127 नगर निगमों में जल कर समाप्त कर दिया था। पश्चिम बंगाल पर इस समय 1,06,000 करोड़ रुपये का कर्ज है।
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