बजट के बाद शेयर बाजार में नहीं आ सकती है तत्काल तेजी
देवांग्शु दत्ता / March 11, 2012
वित्त वर्ष 2011-12 की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की दर 6.1 फीसदी रही है। जनवरी-मार्च 2009 के बाद से यह अब तक की सबसे धीमी तिमाही रही है जब विकास दर घट क र 5.8 फीसदी रह गई थी। हालांकि जीडीपी दर कुछ और नीचे जा सकती है या फिर अगली कुल तिमाहियों तक मौजूदा स्तर पर स्थिर भी रह सकती है लेकिन अब गिरावट अपने स्तर पर पहुंच गया है, ऐसा लग रहा है।
इस बजट पर काफी कुछ निर्भर करेगा। अगर बजट अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा तो यह राजकोषीय घाटे और नीतिगत मुद्दों पर ध्यान देने में सफल नहीं होगा। बजट में सब्सिडी और अन्य चीजों में या कर की दरों में असमान्य बढ़ोतरी हो सकती है। एक अच्छा बजट राजकोषीय घाटे को थामने की कोशिश करेगा और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद करेगा।
बाजार एक खराब बजट के बाद बिकवाली के रूप में तत्काल प्रतिक्रिया दिखा सकता है। लेकिन अगर अच्छा बजट पेश होता है तो भी बाजार में तत्काल तेजी की उम्मीद नहीं की जा सकती है। आखिर चीजों को वापस पटरी पर लाने के लिए बजट क्या कर सकता है? किस बात की संभावना नहीं दिख रही है? जीएसटी को फिलहाल तो भूल जाना ही ठीक होगा। इसके क्रियान्वयन में कम से कम एक वित्त वर्ष की और देरी हो सकती है और यह भी हो सकता है यह अगले आम चुनाव के बाद लागू हो। केंद्र और राज्यों के बीच इस मामले पर सहमति नहीं बनने की वजह से इसकी संभावना कम है कि जीएसटी को आगे बढ़ाने के लिए फिलहाल कोई प्रयास होंगे।
लिहाजा यह मान कर चलें कि मौजूदा कर प्रणाली जारी रह सकती है। कर, उत्पाद एवं सीमा शुल्क में किसी बड़ी कटौती की संभावना नहीं दिख रही है। राजकोषीय घाटा भी काफी अधिक है। सब्सिडी में कमी किए जाने की भी बात दिखाई नहीं देती है। मौजूदा परिस्थितियों में सरकार करों में कटौती के बजाय अधिक राजस्व अर्जित करने पर ध्यान देगी। हां, कुछ खास क्षेत्रों के लिए कुछ उम्मीदें की जा सकती है। बड़ी ढांचागत परियोजनाओं पर खर्च करने के लिए सरकार के पास नकदी भी नहीं है। विभिन्न ढांचागत परियोजनाओं में निजी निवेश आमंत्रित करने के लिए सरकार नीतिगत बाधाओं को दूर कर सकती है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा और नीतिगत बाधाओं को दूर करने के प्रयास हो सकते हैं।
हालांकि ढांचागत निवेश की राह में पर्यावरण संबंधी मंजूरी, लंबी कानूनी प्रक्रिया और भूमि अधिग्रहण जैसी कई बाधाएं हैं। इन्हें दूर करने के लिए बजट में कुछ खास होने की उम्मीद नहीं है। इन तमाम बाधाओं के बीच एक अच्छे बजट में सार्वजनिक इकाइयों के विनिवेश और वित्तीय मजबूती पर ध्यान दिया जा सकता है। अगर सब्सिडी में कमी नहीं की जाती है तो भी सरकार को अधिक सक्षमता से चलाने के लिए भी प्रयास करने की जरूरत है। दूरसंचार क्षेत्र की मुसीबतें दूर हो गई तो सरकार के लिए राजस्व का स्रोत बढ़ सकता है।
इनमें से कोई भी बहुत उत्साहजनक नहीं लग रहा है। कुल मिलाकर बजट तत्काल बाजार में तेजी का बिगुल नहीं फूंक सकता है। हालांकि कुछ ऐसी चीजें होंगी जो निवेशकों में दिलचस्पी पैदा कर सकती हैं। तेजी को लेकर अपेक्षाएं अधिक नहीं हैं। जीएसटी लागू होने की फिलहाल उम्मीद नहीं है लेकिन अगर यह लागू होता है तो काफी खरीदारी हो सकती है। सब्सिडी या करों में कमी हुई तो भी काफी अधिक लिवाली हो सकती है।
बजट से पहले बाजार कुछ सत्रों में तेजी दिखा सकता है। बजट के दिन भी काफी अनिश्चितता रहेगी। अगर कुछ सकारात्मक चीजें नहीं हुईं तो अस्थायी बिकवाली भी देखने को मिल सकती है। ऑप्शन का इस्तेमाल कर अनिश्चितता का लाभ उठाया जा सकता है क्योंकि इससे दोतरफा दांव लगाने का मौका मिलता है। पिछले तीन हफ्तों में निफ्टी 350 अंक ऊपर जा चुका है। अगर यह मान लें कि अगले दो हफ्तों में यह किसी भी दिशा में 350 अंक जा सकता है तो इसका मतलब होगा कि 5000 निफ्टी पुट या 5600 निफ्टी कॉल का सौदा होगा। पिछली बार 5000 पुट का कारोबार 25 अंक और 5600 कॉल का कारोबार 37 अंक की बढ़त पर हुआ था जो सकारात्मक धारणा का संकेत दिया था।
अगर बाजार में बड़ा बदलाव दिखा तो जिन ऑप्शन का सौदा हुआ है उनका प्रीमियम बढ़ेगा जबकि अन्य ऑप्शन गिरकर 5 या उससे कम हो जाएंगे। यानी अगले 10 सत्रों तक दोनों ऑप्शन रखने वाले को 60-70 फीसदी प्रतिफल मिल सकता है। इस तरह की पोजीशन को लॉन्ग स्ट्रैडल कहा जाता है। अगर आप आदतन ऑप्शन कारोबारी नहीं हैं तो भी बिना दिशा के अनिश्चितता की स्थिति बनने पर इस पर ध्यान दे सकते हैं।
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