आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति
अगर इसे सीसीईए की मंजूरी मिल जाती है तो करीब एक दशक में यह पहली वृद्धि होगी।
राशन के दुकानों के जरिये बेची जाने वाली इस चीनी की कीमत 13.50 रुपये प्रति किग्रा है। सरकार हर साल सार्वजनिक वितरण प्रणाली :पीडीएस: के जरिये गरीबों के लिए 27 लाख टन चीनी की बिक्री करती है।
एक सरकारी अधिकारी ने बताया, ैसीसीईए की कल बैठक होनी थी जिसे अब स्थगित कर दिया गया है। अब यह अगले सप्ताह मंगलवार को होगी। ै
सीसीईए को लिखे पत्र में खाद्य मंत्रालय ने कीमत में वृद्धि की कोई निश्चित राशि की सिफारिश नहीं की है तथा इस बारे में फैसला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली इस समिति पर छोड़ दिया है।
हालांकि मंत्रालय ने कहा है कि अगर चीनी कीमत को बढ़ाकर 25.37 रुपये प्रति किग्रा किया जाता है तो सरकार को लेवी चीनी के लिए कोई सब्सिडी का भुगतान नहीं करना होगा। पीडीएस के तहत इस सीमा से एक रुपये की कमी के साथ चीनी की बिक्री पर सरकार को हर वर्ष 270 करोड़ रुपये की सब्सिडी बोझ उठाना पड़ता है।
पीडीएस के तहत लेवी चीनी का खुदरा मूल्य एक मार्च 2002 से 13.50 रुपये प्रति किग्रा निर्धारित किया गया था और यह कीमत तब से अपरिवर्तित है।