| 'जीएसटी में देरी के लिए केंद्र भी जिम्मेदार' | | राज्य के वित्तमंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष सुशील कुमार मोदी ने केंद्र के कर सुधार प्रस्तावों की स्वीकृति के मामले में कदम आगे बढ़ाए हैं। वृष्टि बेनीवाल के साथ बातचीत के प्रमुख अंश... / January 11, 2012 | | | | |
आप राज्यों को जीएसटी से संबंधित मसलों पर सहमत करने के लिए क्या करेंगे?
सेवाकर के मामले में राज्यों को बहुत ज्यादा विशेषज्ञता नहीं है। वे सेवाओं के विविध आयामों के विस्तार में नहीं जा रहे हैं। लेकिन जब अधिकारी एकसाथ बैठेंगे तो उनके विचार नकारात्मक सूची के पक्ष में आएगा, क्योंकि 150 से ज्यादा देशों में, जहां सेवाकर लागू है, नकारात्मक सूची की अवधारणा है। बहरहाल विवाद सेवाओं की परिभाषा को लेकर है। हमने अपनी परिभाषा दी है, लेकिन इसमें बाद में भी सुधार हो सकता है। केंद्र सरकार नकारात्मक सूची के मामले में आगे बढ़ सकती है, लेकिन हम एक शर्त रखेंगे कि केंद्र हमारे अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप न करे।
उद्योग जगत और केंद्र जीएसटी के मसले पर राज्यों के रुख में नरमी की उम्मीद कर रहा है, लेकिन राज्य सरकारें मानने को तैयार नहीं है?
अधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों को संवैधानिक संशोधन विधेयक में शामिल नहीं किया गया। कुछ मसलोंं पर एक राय थी कि सूखा, बाढ़ और अन्य आपदाओं के वक्त राज्यों को कर वसूलने का अधिकार मिलना चाहिए। इसके अलावा अन्य मसले भी थे, जिन्हें विधेयक में शामिल नहीं किया गया।
हर राज्य के अपने-अपने मसले हैं। आप किस तरह सेे पर आगे बढऩे की उम्मीद करते हैं?
तमाम मसले ऐसे हैं, जिस पर प्रत्येक राज्य सहमत है। उदारहण के लिए विवाद निपटारा प्राधिकरण और बैंड के साथ फ्लोर रेट। इसका भी विधेयक में ध्यान नहीं रखा गया। अभी भी कुछ मसले ऐसे हैं, जिन्हें राजनीतिक स्तर पर और संसद में सुलझाया जाना है।
क्या जीएसटी पेश करने के लिए राज्यों ने भी कोई समयसीमा रखी है, या हम सिर्फ इस मसले पर बहस कर रहे हैं?
अगर जीएसटी में देरी होती है तो अगर जीएसटी में देरी होती है तो यह सिर्फ राज्य सरकारों के चलते नहीं होगा। केंद्र सरकार भी इसके लिए बराबर की जिम्मेदार होगी। उन्होंने संवैधानिक संशोधन विधेयक को अंतिम रूप देने में बहुत ज्यादा वक्त लिया। इसके अलावा और भी मसले हैं। हमने अपनी राय सिर्फ 6 महीने में दे दी। अगर वे इसके लिए प्रतिबद्ध हैं तो उन्हें अपने वादों पर भी प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए। हम नहीं जानते कि संसद की स्थायी समिति कितना वक्त लेगी।
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