| बरकरार रहेगी धीमी विकास दर | | मालिनी भुप्ता / November 18, 2011 | | | | |
पिछले कुछ वर्षों से निवेशक भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8 प्रतिशत से अधिक वृद्घि और शेयर बाजारों के प्रीमियम मूल्यांकन को सही मान रहे थे। ऊंची विकास दर की वजह से इस अर्थव्यवस्था के शेयर बाजारों के प्रीमियम भावों को उचित ठहराया गया और इस मामले में उभरती हुई अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर हम हावी रहे।
सेंसेक्स का औसत मूल्य-आय (पीई)अनुपात 20.5 गुना रहा है। इस वर्ष वैश्विक निवेशकों के बीच भ्रष्टाचार और घोटालों के बहुत सारे मामले उजागर होने और जोखिम कम करने के उपाय बढऩे के बावजूद उभरती हुई अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारतीय इक्विटी बाजार 40 फीसदी प्रीमियम पर रहे। लेकिन इसके बाद परिस्थितियां बदलने लगीं। निवेशकों की आय में गिरावट आने लगी और उम्मीदों के विपरीत यह समस्या अब तक खत्म नहीं हुई है। भारतीय उद्योग जगत के दूसरी तिमाही के नतीजे दर्शाते हैं कि सर्वाधिक बुरे हालात का दौर अभी बाकी है। मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में हालांकि बिक्री ठीक-ठाक रही, लेकिन इस अवधि में ज्यादातर कंपनियों के मुनाफे में या तो गिरावट आई है या फिर उसमें बहुत कम बढ़ोतरी हुई।
इक्विटी बाजार के रणनीतिकारों का मानना है कि मुनाफे में आ रही गिरावट तीसरी तिमाही के दौरान बिक्री धीमी होने का संकेत हैं। 'एमके ग्लोबल' के संस्थागत इक्विटी प्रमुख अनीश दमानिया कहते हैं, 'मुझे उम्मीद है कि आय में गिरावट अगली 2 तिमाहियों तक जारी रहेगी। वित्त वर्ष 2012 के दौरान सेंसेक्स के लिए प्रति शेयर आय 9.3 फीसदी गिरकर 1,170 रुपये रह गई। मुझे आशंका
है कि चौथी तिमाही में यह गिरकर तकरीबन 1,120 के स्तर पर आ जाएगी।'
इस तरह के निराशाजनक पूर्वानुमान के कई कारण हैं। दूसरी तिमाही के दौरान निफ्टी 50 की कर बाद आय में सालाना आधार पर 2.7 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के सेंसेक्स में शामिल कंपनियों के मुनाफे में महज 2.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तिमाही के दौरान निफ्टी मिडकैप 50 के शुद्घ मुनाफे में सालाना 20.1 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई।
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