छत्तीसगढ़ के बासुगुडा में सीआरपीएफ और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के कुछ महीने बाद अद्र्धसैनिक बल ने अपने अभियान संबंधी प्रक्रियाओं में बदलाव कर सैनिकों के लिए इलाके का पूर्व मुआयना करना जरूरी बना दिया है।
खोजी सैनिकों :टै्रकर्स: के तौर पर लगे जवान नयी मानक संचालन प्रक्रियाओं :एसओपी: के तहत कोई नया अभियान शुरू करने से पहले अपनी कमान को नक्सली कैडरों और नागरिकों की मौजूदगी के बारे में सचेत करंेगे।
सीआरपीएफ ने अनेक जिलों में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए 80 हजार जवानों को तैनात किया है।
यहां सीआरपीएफ मुख्यालय ने अपने सभी बल कमांडरों को भी इन नये दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश भी जारी कर दिये हैं।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के जंगलों में 28..29 जून की दरमियानी रात को नक्सलियों और जवानों के बीच गोलीबारी में कम से कम 19 लोग मारे गये थे। इसमंे छह सीआरपीएफ जवान घायल भी हो गये।
इस मुठभेड़ ने विवाद भी पैदा कर दिया क्योंकि आरोप था कि नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी में निर्दोष ग्रामीण मारे गये।
भाषा